ब्रसेल्स/ बेल्जियम। भारत और यूरोपीय संघ के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ के 93.5 अरब यूरो (करीब 9,000 करोड़ यूरो से अधिक) के हॉराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी को लेकर बातचीत पूरी कर ली है। इस समझौते के बाद भारतीय शोधकर्ताओं, कंपनियों और शोध संस्थानों के लिए यूरोप में बड़े स्तर पर शोध करने और उसके लिए सीधे आर्थिक मदद पाने के रास्ते खुलेंगे। यूरोपीय आयोग के मुताबिक, समझौते पर हस्ताक्षर और दोनों पक्षों से मंजूरी मिलने के बाद जनवरी 2027 से यह व्यवस्था लागू करने की योजना है। इस समझौते के तहत भारत के वैज्ञानिक और शोध संस्थान हॉराइजन यूरोप के दूसरे स्तंभ यानी पिलर-2 के तहत आने वाली परियोजनाओं में हिस्सा ले सकेंगे। उन्हें यूरोपीय संघ से सीधे अनुदान मिलेगा। खास बात यह है कि भारतीय शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व और समन्वय भी कर सकेंगे। इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, उद्योग, अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा और जैव अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में शोध को आर्थिक मदद दी जाती है।





