नई दिल्ली, एजेंसी। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने और द्विपक्षीय रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों के बीच एक और दौर की कूटनीतिक बातचीत हुई है। इस बैठक में दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के हालात की समीक्षा की। गौर करने वाली बात यह है कि इस बातचीत में भारत ने चीन से नदियों के पानी का डेटा साझा करने को कहा है।मिली जानकारी के अनुसार भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि सीमा पर शांति और अमन-चैन बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों के विकास के लिए सबसे जरूरी शर्त है। इसके तहत भारत ने चीन से ट्रांस-बॉर्डर नदियों के मामलों पर बनी ‘एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म’ की अगली बैठक जल्द बुलाने की मांग की है। आपको बता दें कि यह समिति साल 2006 में बनाई गई थी।बैठक में भारत ने चीन से कहा कि है कि वह नदियों के पानी से जुड़ा डेटा (हाइड्रोलॉजिकल डेटा) देना फिर से शुरू करे और अन्य सहयोग भी जारी रखे।
बता दें कि हाल ही में चीन द्वारा एक बड़े डैम प्रोजेक्ट के एलान के बाद, भारत ने ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली ऐसी गतिविधियों को लेकर निचले इलाकों वाले देशों के साथ पारदर्शिता और बातचीत करने की जरूरत पर जोर दिया है।अब इस मामले में भारत सरकार का कहना है कि एक निचले तटवर्ती देश होने के नाते सीमा के आर-पार नदियों के पानी पर उसके स्थापित अधिकार हैं। गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत लगातार चीन को यह बताते आया है कि ऊपरी इलाकों की गतिविधियों से नीचे के देशों को कोई नुकसान न पहुंचे।गौरतलब है कि गुरुवार को भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने तंत्र (WMCC) की 36वीं बैठक हुई। इस बैठर में दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि LAC पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत गणना से बचने और बकाया मुद्दों को सुलझाने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य चैनलों का इस्तेमाल जारी रखा जाएगा।
इसमें WMCC और स्थानीय कमांडरों स्तर की बैठकें शामिल हैं।भारतीय पक्ष के मुताबिक, पिछले साल हुई 24वीं विशेष प्रतिनिधि (SR) स्तर की वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने सीमा के निर्धारण, सीमा प्रबंधन, तंत्र के निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।इसके अलावा SR वार्ताओं के दौरान दोनों पक्षों ने WMCC के तहत एक ‘विशेषज्ञ समूह’ बनाने पर सहमति जताई थी, जो भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में सीमा निर्धारण के मामले में शुरुआती सफलता की संभावनाओं को तलाशेगा। साथ ही, सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए प्रभावी सीमा प्रबंधन को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी थी।





