बिहार राज्यसभा चुनाव में राजग का क्लीन स्वीप, पांचों सीटें जीतीं

पटना : महागठबंधन ने चुनाव परिणाम को लेकर गंभीर आरोप लगाए बिहार में सोमवार को राज्यसभा चुनाव में सभी पांच सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने जीत हासिल की। मतदान के दौरान विपक्षी महागठबंधन के चार विधायकों की गैरहाजिरी से राजनीतिक समीकरण बदल गया, जिससे राजग को निर्णायक बढ़त मिल गई।

चुनाव में राजग के उम्मीदवार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रथम वरीयता के 44 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी 44 मत प्राप्त हुए। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को 42 और जदयू के रामनाथ ठाकुर को भी 42 वोट मिले। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को केवल 37 वोट मिले। इसके बाद द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती में भाजपा के उम्मीदवार शिवेश राम की जीत के साथ ही पांचवीं सीट भी राजग के खाते में चली गई। उल्लेखनीय है कि राज्य में विधायकों की संख्या और निर्धारित फार्मूले के तहत जीत के लिए 41 विधायकों के मतों की आवश्यकता थी। राज्यसभा चुनाव के बहाने बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला।

चुनावी गणित जहां महागठबंधन के पक्ष में जाता हुआ दिखाई दे रहा था, वहीं मतदान के दिन चार विधायकों की गैरहाजिरी ने पूरा समीकरण बदल दिया। नतीजतन राजग ने पांचों सीटों पर जीत हासिल की और महागठबंधन की रणनीति विफल हो गई। इस चुनाव में पांचवीं सीट सबसे अधिक चर्चा में रही, क्योंकि यहां मुकाबला बेहद कांटे का माना जा रहा था। इस सीट को जीतने के लिए राजग को तीन अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता थी, जबकि महागठबंधन को छह विधायकों के वोट की जरूरत थी। महागठबंधन की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संख्या जुटाने के लिए रणनीति बनाई थी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के 5  विधायकों तथा मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक का समर्थन भी हासिल कर लिया था।

राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह ने भी आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त हुई है और सत्ता का दुरुपयोग किया गया। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए धनबल का इस्तेमाल किया गया, जिससे चुनाव का परिणाम प्रभावित हुआ। उधर महागठबंधन के विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि इस घटना से देश की राजनीति में धनबल के इस्तेमाल की सच्चाई उजागर हो गई है। मतदान प्रक्रिया में शामिल न होने वाले विधायकों ने जनता के साथ विश्वासघात किया है।

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