नेपाल। नेपाल के चार जिलों में आई जलप्रलय के बाद दर्द का सिलसिला टूटने का नाम नहीं ले रहा। जैसे-जैसे भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की विनाशकारी लीला के निशान सामने आ रहे हैं, लोगों की आंखें ऐसे बरस रहीं।दलदली जमीन व रेत के ढेर के बीच अपनों से मिलने की आस लिए लोग पर्वतों के बीच वहां जाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें कई इलाके तो ऐसे हैं, जहां हवाई मार्ग से ही जाना संभव है।जैसे-जैसे स्थिति सामान्य हो रही, लापता लोगों की संख्या बढ़ रही है। करीब 15 हजार लोग ऐसे बताए जा रहे हैं जिनसे अब तक संपर्क नहीं साधा जा सका।तबाही का सिलसिला रसुआ जिले से होते हुए नुवाकोट, धादिंग व गोरखा जिले तक जिस गति से चला है, वह बेहद डराने वाला है। स्थानीय लोग बताते हैं कुछ भी नहीं बचा।कभी न मिटने वाले दर्द के बीच अपनों के खोने के बाद अब फिर से नई दुनिया बसाने की चुनौती है। पर करें भी तो कैसे, हमारे लिए तो दलदली जमीन व पर्वतों की इन शृंखलाओं में खोए अपनों को खोजना सबसे बड़ी प्राथमिकता नुवाकोट के विदुर नगरपालिका के ढुंगे बाजार में हर तरफ तबाही के दृश्य के बीच मिले व्यापारी नवीन व पूर्ण बताते हैं-जीवन में ऐसा दिन ईश्वर किसी को न दिखाए। हमारे अपने जो हमसे दूर हो गए हैं, उनका कहीं पता-ठिकाना नहीं मिल रहा।पड़ोस की गांव पालिका के अध्यक्ष ध्रुव श्रेष्ठ के नेतृत्व में यहां करीब दो सौ लोगों की टीम राहत व बचाव के काम में लगी है। टीम में शामिल बलराम गिरि, श्याम डंगोल कहते हैं-आज आपदा के आगे मानवता हार गई है।जमीन ऐसी हो गई है कि पांव रखने के साथ धंसने का खतरा मंडराने लग रहा। यहां तो सबकुछ तबाह हो चुका है। अब बचाव तो इस बात का हो रहा है कि जो बचे हैं उनके पेट की आग बुझाई जाए। किसी तरह दलदली जमीन को मजबूत बना दिया जाए, ताकि जिंदगी पटरी पर लौट आए।सामान निकालने के लिए मानव शृंखलानुवाकोट के बाढ़ प्रभावित इलाके में दलदली जमीन में रेत से ढंके घरों के ऊपरी हिस्से में दिख रही जरूरी चीजों को निकालने के लिए लोग अनहोनी से सुरक्षित बचने की खातिर सोमवार को मानव शृंखला बनाकर काम करते दिखे।हम जब यहां पहुंचे तो एक मकान के ऊपरी हिस्से से कुछ पीतल के बर्तन, कपड़े और जरूरी कागजात लोग निकाल रहे थे। इस बीच सुरक्षाकर्मी भी तत्पर दिखे। ध्रुव कहते हैं, इस बार नेपाल जो देख रहा, वह पहले की आपदाओं पर भारी है।





