बर्लिन। परदेस में अकेलेपन का दर्द समझने वाली चार भारतीय महिलाओं ने 40 साल पहले जो एक संस्था बनाई थी, उसका पूरा सफर अब एक किताब में दर्ज हो चुका है। मुंबई से बर्लिन पहुंचीं सुशीला शर्मा हक की अगुवाई में लेडीज कॉर्नर बर्लिन ने चार दशक पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर संस्था की सदस्य कविता पाल ने विशेष स्मारिका 40 ग्लोरियस ईयर्स ऑफ लेडीज कॉर्नर बर्लिन तैयार की और इसे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को खुद भेंट किया। स्मारिका जर्मनी में भारत के राजदूत अजित गुप्ते को भी सौंपी गई।सुशीला शर्मा हक ने भारत में टाटा इंस्टीट्यूट से समाजसेवा की पढ़ाई की थी। बर्लिन पहुंचकर उन्होंने देखा कि वहां भारतीय समुदाय की गतिविधियां भारत मजलिस के इर्द-गिर्द सिमटी थीं, जिसे यूरोप की पहली भारतीय संस्था माना जाता है। वहां ज्यादातर पुरुष ही जुटते थे और महिलाओं को केवल तीज त्योहारों पर बुलाया जाता था। सुशीला ने उन पुरुषों की पत्नियों और महिला मित्रों से एक-एक कर संपर्क साधा।





