नई दिल्ली, एजेंसी। इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव का मतदान होगा. यह चुनाव केवल एक प्रधानमंत्री चुनने का अवसर नहीं है. यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक प्रभुत्व, सात अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद उनकी जवाबदेही और पश्चिम एशिया में इजरायल की भावी रणनीति का भी इम्तिहान है. इस चुनाव की गूंज यरूशलम तक सीमित नहीं रहेगी. भारत के लिए भी इसके नतीजे महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि रक्षा सहयोग से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में आर्थिक संपर्क तक, कई रणनीतिक हित इससे जुड़े हैं. साल 2019 के बाद इजरायल में यह छठा चुनाव है. इजरायल की 120 सदस्यीय नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का समर्थन जरूरी है. इस बार नेतन्याहू के सामने गादी आइज़ेनकोट और नफ्ताली बेनेट जैसे नेताओं की चुनौती है. अंतिम सर्वेक्षणों में आइज़ेनकोट और बेनेट पसंदीदा प्रधानमंत्री के सवाल पर नेतन्याहू से आगे दिखाई दे रहे हैं. फिर भी इजरायल की राजनीति में लोकप्रियता और सत्ता के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है. यहां चुनाव जीतने से अधिक कठिन काम बहुमत जुटाना है.





