ऋषिकेश : ऋषिकेश योग नगरी रेलवे स्टेशन के समीप खांड गांव क्षेत्र में सोमवार रात उज्जैनी एक्सप्रेस के तीन डिब्बों के पटरी से उतरने की घटना ने रेलवे व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि ट्रेन में यात्री मौजूद नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मियों के बीच चर्चा का विषय सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि उसके पीछे की परिस्थितियां बन गई हैं।रेलवे की शुरुआती दलील तकनीकी खराबी और ब्रेक फेल होने की दी जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों को यह बात हजम नहीं हो रही। लोगों का कहना है कि जब ट्रेन को केवल मेंटेनेंस या शंटिंग के लिए ले जाया जाता है तो आमतौर पर इंजन अकेले या सीमित रैक के साथ मूव करता है। ऐसे में पूरी ट्रेन का बोगियों सहित ट्रैक पर होना कई सवाल पैदा कर रहा है।घटना के बाद सबसे अधिक चर्चा लोको पायलट की मौजूदगी को लेकर रही। हादसे के वक्त इंजन में चालक मौजूद था या नहीं, इसको लेकर रेलवे की ओर से देर रात तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाए कि हादसे के करीब ढाई घंटे तक सिर्फ जीआरपी और निचले स्तर के कर्मचारी ही हालात संभालते नजर आए।





