नई दिल्ली, एजेंसी। मिन आंग ह्लाइंग को चीन का समर्थक माना जाता है लेकिन नई दिल्ली में उन्होंने पीएम मोदी को आश्वासन दिया कि म्यांमार की जमीन का इस्तेमाल भारत के हितों के खिलाफ नहीं होगा।भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की 1640 किलोमीटर से लंबी सीमा म्यांमार के साथ है। इस पड़ोसी देश की आंतरिक अस्थिरता और वहां चीन के बढ़ते प्रभुत्व लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के बीच हुई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में इन सभी संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।इसमें व्यापार एवं आर्थिक संबंध, रक्षा एवं सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, विकास सहायता तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं। दोनों पक्षों ने विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों और ज्ञापनों पर चल रही चर्चाओं को जल्द पूरा करने की इच्छा जताई।राष्ट्रपति ह्लाइंग भरी मत से विजयी म्यांमार में अप्रैल, 2026 में चुनाव हुआ था जिसमें राष्ट्रपति ह्लाइंग को भारी बहुमत से विजयी घोषित किया गया है। इसके पहले वह कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे हैं। इस चुनाव से वैसे इस देश की आंतरिक स्थिति में बहुत सुधार की संभावना नहीं दिख रही है।एक तरफ म्यांमार की सेना है और दूसरी तरफ लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने वाले दल व चिन ब्रदरहुड और आराकान आर्मी जैसे विद्रोही सेना है। देश के रखाइन प्रांत के अधिकांश हिस्से पर सैन्य विद्रोहियों का कब्जा है। साथ ही चीन का वर्चस्व भी म्यांमार की सरकार पर बढ़ता जा रहा है।





