काठमांडू : नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उनके साथ पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक भी हिरासत में हैं। पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों में 70 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद नई सरकार ने कार्रवाई शुरू की है। नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पिछले साल हुए घातक जेन-जी विरोध प्रदर्शनों में कथित भूमिका के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब नए प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने हाल ही में पद की शपथ ली है। सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद हुई इस गिरफ्तारी ने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
नई सरकार का क्या रुख है इस मामले पर?
नए गृहमंत्री सुदन गुरूंग ने कहा कि वादा तो वादा होता है और कानून से ऊपर कोई नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह कदम न्याय की दिशा में पहला कदम है और देश को नई दिशा देने की कोशिश है। सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और कानून अपना काम करेगा। जांच आयोग ने केवल ओली और रमेश लेखक ही नहीं, बल्कि कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की है। इनमें नेपाल पुलिस के तत्कालीन महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग का नाम भी शामिल है। ऐसे में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला अब नेपाल की राजनीति और न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।





