बिहार में जमीन-फ्लैट खरीदना हुआ महंगा: सर्किल रेट बढ़े

पटना।  बिहार में जमीन की कीमतों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। एक दशक बाद सरकार ने गांव से लेकर शहरी इलाकों तक एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) में वृद्धि कर दी है।एमवीआर वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर जमीन की रजिस्ट्री की जाती है और इसे सर्किल रेट भी कहा जाता है।राज्य सरकार ने जमीन की कीमतों के लिए वार्षिक वृद्धि का फार्मूला भी तय कर दिया है। इसके अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में एमवीआर में स्वत: पांच प्रतिशत की वृद्धि होगी।इसके अलावा हर तीन वर्ष पर विभागीय स्तर पर एमवीआर का पुनरीक्षण किया जाएगा। इस दौरान नई सड़कें, औद्योगिक क्षेत्र, शहरी विस्तार, हवाईअड्डे, रेलवे स्टेशन और सिंचाई परियोजनाओं जैसे विकास कार्यों को ध्यान में रखा जाएगा।विभागीय जानकारी के अनुसार, वर्तमान एमवीआर के आधार पर राज्य की परियोजनाओं के लिए 14,897 करोड़ रुपये मुआवजा देय था। नई दरों के लागू होने के बाद यह राशि बढ़कर 18,637 करोड़ रुपये हो जाएगी।राज्य सरकार ने एमवीआर निर्धारण के लिए भूमि की श्रेणियों को भी नए सिरे से तय किया है। अब तक अलग-अलग जिलों में जमीन की अलग-अलग श्रेणियां लागू थीं।नई व्यवस्था के तहत सभी जिलों में एकरूपता लाई गई है। ग्रामीण और आसपास के क्षेत्रों में भूमि की सात श्रेणियां तथा शहरी एवं मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों में छह श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। ने बताया किसानों के लिए लाभकारी फैसलामद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग एक दशक बाद एमवीआर बढ़ाया गया है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण कर रही है। ऐसे में एमवीआर बढ़ने से किसानों को पहले की तुलना में अधिक मुआवजा राशि प्राप्त होगी।

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