नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारत ने पड़ोसी देश नेपाल को व्यापक मानवीय सहायता देने की पेशकश की है।भारत की तरफ से आपदा प्रभावित इलाकों में शीघ्र नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) की विशेषज्ञ टीम भेजने की पेशकश की गई है लेकिन शुक्रवार देर शाम तक इस बारे में नेपाल की मंजूरी नहीं मिली है।लेकिन दूसरी तरफ ऐसी सूचना है कि आपदा वाले इलाकों में चीन की सेना राहत कार्य तेजी से लॉन्च कर चुकी है।इस बारे में चीन की मीडिया में खबरें दिखाई जा रही हैं कि नेपाल व चीन की सेना मिल कर राहत कार्य चला रहे हैं। इससे कूटनीतिक सर्किल में कुछ चर्चाएं चल रही हैं कि कहीं नेपाल किसी दबाव में तो नहीं।नेपाल सरकार का कहना है कि वह बड़े पैमाने पर विदेशी मदद के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रही है। मित्र देशों की तरफ से आये प्रस्तावों को उनकी जरूरत को देखते हुए अनुमति दी जा रही है।वर्ष 2015 में नेपाल ने बहुत ही विध्वंसकारी भूकंप का सामना किया था तब कई देशों की एजेंसियों ने वहां राहत कार्य चलाये थे लेकिन वह अनुभव बहुत अच्छा नहीं था। इन एजेंसियों के बीच आपसी प्रतिस्पर्द्धा का माहौल था। इस वजह से नेपाल सरकार इस बार अपनी स्थानीय पुलिस टीम व सुरक्षा बलों पर भरोसा कर रही है।विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया है कि जहां हमें अतिरिक्त तकनीकी मदद की जरूरत होगी, वहां मदद ली जाएगी।भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने खोज-बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए एनडीआरएफ टीमों व आवश्यक उपकरण भेजने का विशिष्ट प्रस्ताव दिया है। हमने नेपाल अधिकारियों को एनडीआरएफ टीमें और उनसे जुड़े उपकरण भेजने का प्रस्ताव दिया है, जो चल रहे सर्च एंड रेस्क्यू आपरेशन में मदद कर सकते हैं। हम इस मोर्चे पर नेपाल सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।





