वॉशिंगटन : ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा और F-1 OPT कार्यक्रमों को महंगा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित बदलावों के तहत H-1B से जुड़ा शुल्क 1,03,265 डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि OPT आवेदनों पर भी भारी फीस लगाने की संभावना जताई गई है। इन योजनाओं का असर भारतीय पेशेवरों पर खास तौर पर पड़ सकता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन एच-1बी (H-1B) वीजा और F-1 ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रमों के लिए नए शुल्क लागू करने की तैयारी में है। इसके तहत H-1B वीजा शुल्क को बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर यानी 98.92 लाख भारतीय रुपये किए जाने का प्रस्ताव है।अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएसएस) ने यह प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे सोमवार को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया। पिछले साल भी ऐसा शुल्क लगाया गया था, लेकिन अदालतों ने इसे रोक दिया था। प्रस्तावित नियम लागू होने पर अमेरिका में विदेशी नागरिकों के काम करने, विश्वविद्यालय से नौकरी की ओर बढ़ने वाले छात्रों और H-1B कर्मचारियों को प्रायोजित करने वाले नियोक्ताओं की लागत बढ़ सकती है।एच-1बी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती हैं। इसके तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अलावा उच्च डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 वीजा उपलब्ध हैं। इन वीजा को तीन से छह साल के लिए मंजूरी दी जाती है।पिछले साल ट्रंप के आदेश के बाद कुछ H-1B वीजा हासिल करने की लागत काफी बढ़ गई थी। इससे पहले विभिन्न परिस्थितियों के आधार पर इन वीजा के लिए आमतौर पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर तक शुल्क देना पड़ता था।प्रस्तावित बदलाव का भारतीयों पर खास असर पड़ सकता है। H-1B वीजा हासिल करने वालों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने 2024 में 3,99,402 H-1B याचिकाओं को मंजूरी दी थी।





