भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा: क्या बिहार के हितों को ध्यान में रखकर बदलेगा

नई दिल्ली, एजेंसी। भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा समझौता 2026 में समाप्त हो रहा है, जिससे बिहार के हितों को नए सिरे से शामिल करने की चुनौती है, जो अपनी पानी की जरूरत और सिल्टेशन की समस्या को नए करार में शामिल करने की मांग कर रहा है।नई दिल्ली। बांग्लादेश के साथ फरक्का जल समझौते की अवधि खत्म होने से पहले सरकार के सामने बिहार के हितों को नए सिरे से शामिल करने की चुनौती है। वर्ष 1996 में भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा समझौता 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रहा है।बिहार लगातार मांग करता रहा है कि नए करार में राज्य की पानी की जरूरत और सिल्टेशन की समस्या को ध्यान में रखा जाए। केंद्र की ओर से गठित आंतरिक समिति ने लीन सीजन (जनवरी से मई) के दौरान बिहार के लिए 900 क्यूसेक पानी की व्यवस्था का सुझाव दिया है। बिहार करीब 2,000 क्यूसेक पानी चाहता है। ऐसे में पुराने समझौते पर फिर से विचार करने का दबाव बढ़ रहा है।बिहार की चिंता का सबसे बड़ा कारण है कि गंगा राज्य के ऊपरी हिस्से में बहती हुई बांग्लादेश की ओर जाती है। गर्मी एवं कम बारिश के महीनों में बिहार को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। इसलिए फरक्का पर जल बंटवारे का असर बिहार की जल उपलब्धता पर पड़ता है।

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *