मुंबई। भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा क्षेत्र में अमेरिका की बड़ी वित्तीय ताकत की एंट्री होने जा रही है। बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के बीच पक्का समझौता हुआ है। इसके तहत बैंक ऑफ अमेरिका, जियो क्रेडिट लिमिटेड में 49.9 प्रतिशत तक हिस्सेदारी खरीदेगा। इस सौदे का कुल मूल्य 18,268 करोड़ रुपये, यानी करीब 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर है।जियो क्रेडिट लिमिटेड, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की पूरी तरह स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है। कंपनी कर्ज देने का कारोबार करती है। प्रस्तावित निवेश में शेयर और वारंट शामिल हैं। यह सौदा शेयर और वारंट के वरीयता आवंटन के माध्यम से पूरा किया जाएगा। सौदे के बाद जियो क्रेडिट में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका की अहम साझेदारी होगी। दोनों कंपनियों को निदेशक मंडल में बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा।जियो क्रेडिट ने अपने परिचालन के महज दो साल के भीतर कर्ज कारोबार में तेजी से विस्तार किया है। 30 जून 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन संपत्तियां 30,667 करोड़ रुपये, यानी करीब 3.2 अरब अमेरिकी डॉलर थीं।प्रस्तावित संयुक्त उपक्रम में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की डिजिटल पहुंच और भारतीय बाजार की समझ को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय सेवा विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाएगा।कंपनियों के मुताबिक, इस साझेदारी से जियो क्रेडिट को कर्ज कारोबार को टिकाऊ तरीके से बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पूंजी मिलेगी। इसके साथ वित्तीय सेवाओं, शासन व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में बैंक ऑफ अमेरिका की विशेषज्ञता भी कंपनी को मिलेगी।जियो फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस साझेदारी को कंपनी के मिशन में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि बैंक ऑफ अमेरिका के साथ सहयोग जियो की डिजिटल पहुंच और बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक विशेषज्ञता को जोड़कर जिम्मेदार कर्ज तक पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी वित्तीय सेवाओं की पहुंच को और व्यापक बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन मोयनिहान ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकास बाजारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह निवेश भारत के भविष्य में बैंक ऑफ अमेरिका के भरोसे को दिखाता है। उनके मुताबिक, बैंक इस बाजार को अच्छी तरह समझता है और कई दशकों से भारत का समर्थन करता आया है।





