देहरादून, 18 मार्च: उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय में अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरूगेशन की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई, जिसमें गढ़वाल और कुमाऊं रेंज के आईजी, सभी जनपद प्रभारी, अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी शामिल हुए। बैठक में भूमि संबंधी धोखाधड़ी, सत्यापन अभियान, गुमशुदगी के मामलों और लंबित विवेचनाओं की गहन समीक्षा की गई।
एडीजी ने 15 फरवरी 2026 से चल रहे सघन सत्यापन अभियान की प्रगति का जायजा लेते हुए बताया कि अब तक राज्यभर में 1,22,411 सत्यापन किए जा चुके हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान को और तेज किया जाए तथा संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि सत्यापन के दौरान यह विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई कुख्यात अपराधी बाहरी राज्यों से आकर यहां शरण न ले। इसके लिए विभिन्न आपराधिक पोर्टलों की मदद लेने के निर्देश दिए गए।
भूमि संबंधी धोखाधड़ी के मामलों पर चर्चा करते हुए डॉ. मुरूगेशन ने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रकरणों में राजपत्रित अधिकारी की जांच के बाद ही नियमानुसार मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि दीवानी प्रकृति के मामलों में पुलिस अनावश्यक हस्तक्षेप न करे। गढ़वाल और कुमाऊं रेंज के आईजी को इन मामलों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
गुमशुदगी, विशेषकर नाबालिग बच्चों के मामलों को लेकर एडीजी ने संवेदनशीलता बरतने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गुमशुदगी की सूचना मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज कर खोजबीन शुरू की जाए और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गुमशुदगी मामलों में रिकवरी रेट बढ़ाना प्राथमिकता होनी चाहिए और प्रत्येक जनपद प्रभारी साप्ताहिक समीक्षा करें।
बैठक में तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की विवेचकवार समीक्षा भी की गई। एडीजी ने लंबित विवेचनाओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। विदेश में रह रहे आरोपियों के खिलाफ एलओसी और रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी तेज करने को कहा गया।





