देहरादून : लैंसडौन क्षेत्र के फरसूला गांव के निकट भड़की भीषण जंगल की आग पर वन विभाग की टीम ने करीब 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया। आग से करीब चार हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ, जबकि धुएं और लपटों के चलते लैंसडौन-कोटद्वार मार्ग पर आवाजाही भी बाधित रही। वहीं टिहरी गढ़वाल के गजा क्षेत्र में भी वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। लैंसडौन क्षेत्र में मंगलवार दोपहर फरसूला के निकट जंगल में भीषण आग लग गई। इस आग से करीब चार हेक्टेयर वन संपदा प्रभावित हुई। वन कर्मियों ने बुधवार दोपहर तक चले अभियान के बाद आग पर काबू पा लिया। वहीं टिहरी गढ़वाल जिले के गजा इलाके के जंगलों में भी आग लगी, जिस पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू लिया।
आग मंगलवार अपराह्न लैंसडौन फरसूला गांव के पास शुरू हुई और तेजी से फैल गई। तेज हवाओं के कारण आग की लपटें विकराल हो गईं। यह आग लैंसडौन-कोटद्वार मार्ग तक पहुंच गई। इससे सड़क पर धुंध छा गई और वाहनों की आवाजाही बाधित हुई। कई पर्यटकों ने भयभीत होकर अपने वाहन वापस दुगड्डा की तरफ मोड़ लिए। आग की चपेट में कई बड़े पेड़ भी आ गए। सूचना मिलने पर वन कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया।लैंसडौन के रेंजर राकेश शाह ने बताया कि फरसूला के नापखेत से आग शुरू हुई थी। इससे उमरीखाल, सकन्याणी, कुठालडांडा और दर्था के नापखेतों को नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि करीब चार हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है। आग पर नियंत्रण के लिए वन दरोगा रमेश थपलियाल, हरक सिंह दानू, कुलदीप नौडियाल, वन आरक्षी काजल, शीतल और आशीष रावत मौजूद रहे। इनके साथ फरसूला व डेरियाखाल क्रू-स्टेशन के दस वन कर्मी भी शामिल थे। इन सभी ने मिलकर बुधवार दोपहर तक आग पर काबू पाया।





