लखनऊ। प्रदेश में बुधवार को आई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों पर बने चक्रवाती परिसंचरण व दक्षिणी राजस्थान से आ रही पुरवा हवा से कई जिलों में 100 किमी प्रति घंटा से अधिक रफ्तार से आंधी चली।इस कारण अलग-अलग जिलों में पेड़, दीवार और बिजली गिरने से कुल 47 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। आंधी के कारण रेल और बिजली व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित रही। प्रयागराज में 16, प्रतापगढ़ में चार और कौशांबी में एक व्यक्ति की मौत हो गई। प्रयागराज के हंडिया क्षेत्र में सबसे ज्यादा 10 लोगों ने जान गंवाई। तेज चक्रवाती आंधी के दौरान दो हजार से अधिक पेड़ उखड़ गए। रेल लाइनों पर पेड़ गिरने से कई ट्रेनें रास्ते में खड़ी रहीं।प्रयागराज-लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस भी करीब सवा घंटा रुकी रही। कानपुर और आसपास के जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के दौरान 12 लोगों की मौत हुई। फतेहपुर में निर्माणाधीन भवन गिरने, पेड़ टूटने और हादसों में सात लोगों की जान चली गई।उन्नाव में पेड़ और बिजली का खंभा गिरने से एक बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई। कानपुर देहात में युवती और बालिका की जान चली गई, जबकि 33 बकरियां भी मर गईं। कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग और उन्नाव-रायबरेली रेलमार्ग पर पेड़ गिरने से ट्रेनों का संचालन घंटों प्रभावित रहा।कई जिलों में बिजली के खंभे और तार टूटने से हजारों गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सरकार ने मृतकों के स्वजन को आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। बरेली मंडल में भी आंधी जानलेवा साबित हुई। बरेली, बदायूं और आसपास के क्षेत्रों में पेड़ और दीवार गिरने से नौ लोगों की मौत हो गई।





