सीट का समीकरण: सपा के इस गढ़ में 30 साल पहले जीती थी भाजपा

नोएडा : उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ भाजपा के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और अन्य दल अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात अमरोहा (Amroha) विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।

के पहले विधायक मोहम्मद तकी हादी बने। इन दोनों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।2022 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में सपा के महबूब अली ने भाजपा के राम सिंह को हराया था। इस चुनाव में सपा के महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राम सिंह को 57,699 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में सपा के महबूब अली ने 70000 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। इससे पहले 2017, 2012 और 2007 में भी सपा उम्मीदवार महबूब अली ने इस सीट से जीत हासिल की थी।

ये महबूब अली की लगातार पांचवी और सपा की लगातार चौथी जीत थी। भाजपा यहां आखिरी बार 30 साल पहले 1996 में जीती थी।अमरोहा विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, चौहान और अनुसूचित जाति (SC) आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 58% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 7%, सैनी मतदाताओं की करीब 5% और जाट मतदाताओं की करीब 4% है, जबकि गुर्जर व वैश्य मतदाता क्रमशः लगभग 3% और 2.5% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं, क्योंकि उनकी संख्या अधिक है।अमरोहा विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो शुरुआती समय में अमरोहा सीट पर कांग्रेस की पकड़ रही। 1952 के समय अमरोहा (पूर्व) और अमरोहा (पश्चिम) नाम की दो विधानसभा सीटें थीं। अमरोहा (पूर्व) के पहले विधायक खियाली राम, तो वहीं अमरोहा (पश्चिम) के पहले विधायक मोहम्मद तकी हादी बने। इन दोनों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।1962 के चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के शराफत हुसैन रिजवी विजयी हुए। उन्हें कुल 13,570 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार शाहजादे लाल को पराजित किया, जिन्हें कुल 10,397 वोट मिले। शराफत हुसैन रिजवी ने यह चुनाव 3,173 मतों के अंतर से जीता।इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) के शराफत हुसैन विजयी हुए। उन्हें 25,497 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस की एस. डब्ल्यू. देवी को पराजित किया, जिन्हें 20,254 वोट मिले। शराफत हुसैन ने यह चुनाव 5,243 वोटों के अंतर से जीता।

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