शांति वार्ता  : जेडी वेंस पाकिस्तान रवाना, ईरान से कोई नहीं पहुंचा

नई दिल्ली, एजेंसी। करीब 40 दिनों तक चले सैन्य घमासान के बाद दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार से पाकिस्तान में प्रस्तावित शांति वार्ता अनिश्चितता के घेरे में आ गई है। इस असमंजस के केंद्र में लेबनान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष है, जहां हिजबुल्ला और इजरायली सेना के बीच झड़पें थमने का नाम नहीं ले रहीं। ईरानी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि लेबनान में हमले नहीं रुके और विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियां जारी नहीं की गईं, तो वह वार्ता से हट सकता है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बकर गलीबाफ ने एक्स पर कहा कि लेबनान में युद्धविराम और ईरानी संपत्तियों की रिहाई, वार्ता से पहले पूरी की जानी चाहिए। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता में अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। उनके साथ पश्चिम एशिया में विशेष अमेरिकी दूत स्टीव विटकाफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर प्रमुख रूप से शामिल होंगे। पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वह ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए ट्रंप ने अपनी टीम के सामने स्पष्ट अपेक्षाएं रख दी हैं और समझौते की दिशा में ठोस प्रगति पर जोर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई और कहा कि अगर दोनों पक्ष ईमानदारी से बात करेंगे, तो सकारात्मक नतीजे सामने आ सकते हैं।साथ ही वेंस ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरानी पक्ष ने हमारे साथ खिलवाड़ की कोशिश की तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत में अमेरिका ईरान से अपने नागरिकों की रिहाई का मुद्दा भी उठा सकता है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में यह मुद्दा शामिल होने की संभावना है। हालांकि, व्हाइट हाउस और ईरान की ओर से इस पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।ईरान की नई चेतावनीरॉयटर्स के अनुसार, पाकिस्तान में ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद प्रमुख मोहम्मद बकर गलीबाफ करेंगे। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उप विदेश मंत्री मजीद तख्त खांची प्रमुख रूप से शामिल होंगे। ईरानी संसद प्रमुख एमए गलीबाफ ने एक्स पर लिखा कि लेबनान में युद्धविराम और विदेश में जब्त ईरानी संपत्ति को छोड़ने की शर्तों पर अमेरिका और ईरान परस्पर सहमत थे, लेकिन इन्हें लागू किया जाना लंबित है।वार्ता शुरू होने से पहले इन दोनों मुद्दों का समाधान किया जाना अनिवार्य है। इससे पहले ईरान ने अमेरिका पर 10 सूत्रीय प्रस्तावों में शामिल तीन ¨बदुओं के उल्लंघन का आरोप लगाया था। इसमें लेबनान युद्धविराम, फार्स प्रांत पर ड्रोन घुसपैठ और यूरेनियम संवर्धन अधिकार के मुद्दे शामिल थे।

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