भारत ने पाकिस्तान के बाढ़ के बेबुनियाद दावों को किया खारिज, भारतीय का दोटूक जवाब

नई दिल्ली, एजेंसी।भारत ने पाकिस्तान के उन दावों को खारिज कर दिया कि उसने दावा किया था कि भारत ने जानबूझकर सीमा पार बाढ़ की स्थिति उत्पन्न की। इन दावों को “निराधार और तथ्यों के विपरीत” बताते हुए यह आग्रह किया कि भारत मानवता के कारणों से इस्लामाबाद को महत्वपूर्ण बाढ़ डाटा प्रदान करना जारी रखेगा, जैसा कि पहले किया गया था।पाकिस्तानी मीडिया में भारत के बाढ़ लाने के आरोपों को खारिज करते हुए विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि चिनाब नदी में जल प्रवाह में वृद्धि पूरी तरह से मानसून के मौसम के दौरान भारी वर्षा के कारण हुई है।जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमने पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों को देखा है जो आरोप लगाती हैं कि भारत जानबूझकर पाकिस्तान में बाढ़ पैदा कर रहा है और ऐसे आरोप निराधार और तथ्यों के विपरीत हैं।

उन्होंने बताया कि चिनाब में जल स्तर में वृद्धि “20-23 जुलाई 2026 के दौरान जम्मू और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में तीव्र मानसूनी वर्षा का प्रत्यक्ष परिणाम है।”जायसवाल ने कहा, “इसलिए, नदी के प्रवाह में वृद्धि एक प्राकृतिक जलविज्ञान प्रतिक्रिया है जो भारी मानसूनी वर्षा के कारण हुई है और यह भारत की किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई का परिणाम नहीं है।सिंधु समझौते के स्थगन पर भारत कायमइंडस वाटर ट्रीटी (आइडब्ल्यूटी) के संबंध में आसियान फोरम में पाकिस्तान द्वारा की गई टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत के सिंधु समझौते के स्थगत पर दृढ़ रुख को दोहराया।जायसवाल ने कहा कि आसियान फोरम का उपयोग पाकिस्तान ने कुछ टिप्पणियां करने के लिए किया। हमने अपने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से उठाए गए मुद्दों का स्पष्ट खंडन किया है।उन्होंने बताया कि भारत की स्थिति इस संधि पर अपरिवर्तित है। उन्होंने जोर दिया, “इंडस वाटर ट्रीटी तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान अपनी सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को स्थायी और विश्वसनीय रूप से समाप्त नहीं करता।”चीन और क्षेत्रीय संप्रभुता पर पूछे सवाल पर जायसवाल ने विदेश मंत्री के बयान का उल्लेख किया कि भारत चीनी संप्रभुता का उल्लंघन नहीं करता। उन्होंने जोर दिया कि बीजिंग “1963 से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा किए हुए है”।

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