झारखंड की दनुआ घाटी में भीषण हादसा: ट्रेलर में जा घुसी कार 5 की मौत

 हजारीबाग। दनुआ घाटी ने एक बार फिर अपनी भयावहता का ऐसा मंजर दिखाया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। शनिवार की शाम लगभग 6:30 से 7 बजे के बीच जोडराही पुल के पास हुए भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, अभी किसी की पहचान नही हो सकी है।बताया जा रहा है कि धनबाद की ओर आ रही सेलेरियो कार (संख्या जे एच 10 सीयू 3472) दनुआ घाटी में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार किसी ट्रेलर में कार पीछे से पूरी तरह समा गई। लोगों ने बताया कि उक्त ट्रेलर वाहन वहां से निकल गया।कार की टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार संभल पाती, इससे पहले ही पीछे से आ रहे दूसरे ट्रक ने भी उसे अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते कार पिसकर मलबे में तब्दील हो गई।

कार के उड़े परखच्चेप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भयावह थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। उसमें सवार लोगों को बाहर निकलने का जरा भी मौका नहीं मिला। घटनास्थल पर ही पांच की मौत हो गई।इनमें दो पुरुष, एक महिला और दो मासूम बच्चा शामिल हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कार में शव बुरी तरह पीस गया है। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। रात अंधेरे के कारण कितने लोग कार में थे, इसकी गिनती भी नहीं की जा पा रही थी।हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। दोनों ट्रक चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर डीएसपी अजीत कुमार विमल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।कार इतनी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी कि शवों को बाहर निकालना भी बेहद मुश्किल हो गया। काफी मशक्कत के बाद राहत दल ने शवों को निकालने का प्रयास शुरू किया, लेकिन देर रात तक पहचान नहीं हो सकी थी।लोगों का फूटा गुस्सा स्थानीय लोगों का कहना है कि दनुआ घाटी अब “मौत की घाटी” बन चुकी है। यहां हर साल सैकड़ों दुर्घटनाएं और दर्जनों मौतें होती हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो प्रशासन स्थायी समाधान कर पाया है और न ही राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कोई ठोस कदम उठाया है।लोगों में आक्रोश है कि हर बड़ी दुर्घटना के बाद कुछ दिनों तक सख्ती दिखती है, फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। हर दिन दनुआ घाटी में किसी न किसी की जिंदगी निगल रही है। अब जरूरत है स्थायी और सख्त कदमों की, ताकि यह घाटी फिर किसी परिवार का चिराग न बुझाए।

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