नई दिल्ली, एजेंसी। भूस्खलन से सबसे ज्यादा असर संपर्क मार्गों पर हुआ है। प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में 100 से ज्यादा गांव जिला मुख्यालयों से कट गए हैं।श्रीअमरनाथ, मां वैष्णो देवी और शिवखोड़ी यात्राएं तीसरे दिन भी स्थगित रही। हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा की बोह घाटी में मंगलवार को बादल फटने से आई बाढ़ में नौ मकान बह गए, जबकि सात को क्षति पहुंची।मंगलवार को ऊधमपुर और रामबन जिलों में कई जगह पत्थर गिरने से जम्मू-श्रीनगर हाईवे प्रभावित हुआ। जम्मू-पठानकोट हाईवे पर भी कई जगह जलभराव से यातायात दिनभर बाधित होता रहा।जम्मू-कश्मीर में 100 से अधिक गांव जिला मुख्यालयों से कटेइसके अलावा राजौरी-पुंछ हाईवे भी भूस्खलन से करीब ढाई घंटे बाधित रहा। बड़गाम में सुखनाग नदी में बाढ़ में कई दुकानें बह गईं। तवी, चिनाब सहित सभी नदी-नाले उफान पर हैं। रियासी में चिनाब पर बने सलाल बांध के सभी गेट एहतियातन खोल दिए गए हैं।इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात कर बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। शाह ने राहत, बचाव व पुनर्वास कार्यों के लिए केंद्र की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।अमरनाथ, वैष्णो देवी यात्राएं लगातार तीसरे दिन भी स्थगित रहींसिन्हा ने बताया कि राजौरी-पुंछ जिलों में प्रभावित 435 मार्गों में से 356 सड़कों को बहाल कर दिया गया है। प्रदेश में वर्षा-बाढ़ और भूखस्लन से तीन दिन में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें करीब 21 मौतें राजौरी और पुंछ जिलों में ही हुई हैं।





