नयी दिल्ली, एजेंसी।भारत में सोने के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव है. लोग, खासकर महिलाएं अपनी बचत को सोने के रूप में रखने में गर्व महसूस करती हैं. अनुमान है कि दुनिया में कुल ज्ञात सोने में से, जो 1,87,000 टन है, लगभग 25,000 टन भारत में है, जो भारतीय घरों में ऐतिहासिक रूप से रखे गये सोने और दुनिया के बाकी हिस्सों से सोने की खरीद का परिणाम है.
देश की राजधानी में 10 ग्राम सोना नवरात्रि में 1,17,475 रुपये की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद हालांकि थोड़ा लुढ़क गया, लेकिन इसमें तेजी बने रहने की संभावना है. विगत नौ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 3,673.95 डॉलर पर पहुंच गयी थी. इस साल अब तक सोने की कीमतों में 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. वर्ष 1988 में सोने की कीमत 430 डॉलर प्रति औंस थी, जो सितंबर, 2018 तक बढ़कर 1,195 डॉलर प्रति औंस हो गयी, यानी 30 वर्षों में 3.43 फीसदी की वार्षिक वृद्धि. पर पिछले सात साल में सोने की कीमत करीब 17.5 फीसदी सालाना की दर से बढ़कर 3,654 डॉलर तक पहुंच गयी है. दुनियाभर के आर्थिक विश्लेषक सोने की कीमतों में उछाल के पीछे वैश्विक मौद्रिक व वित्तीय स्थितियों में महत्वपूर्ण बदलावों की ओर इशारा कर रहे हैं.
भारत में सोने के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव है. लोग, खासकर महिलाएं अपनी बचत को सोने के रूप में रखने में गर्व महसूस करती हैं. अनुमान है कि दुनिया में कुल ज्ञात सोने में से, जो 1,87,000 टन है, लगभग 25,000 टन भारत में है, जो भारतीय घरों में ऐतिहासिक रूप से रखे गये सोने और दुनिया के बाकी हिस्सों से सोने की खरीद का परिणाम है. भारतीय रिजर्व बैंक के पास 31 दिसंबर, 2024 तक 876 टन सोना था, जो अब दुनिया में आठवां सबसे बड़ा भंडार है. खासकर विकासशील देशों को पिछले कुछ दशकों में डॉलर के लगातार मजबूत होने के कारण भारी नुकसान हुआ है. भारत भी कोई अपवाद नहीं है.





