छत्तीसगढ़ में मिला था दवाओं की सप्लाई का ठेका, कांग्रेस ने की  जांच की मांग

रायपुर। गुणवत्ता परीक्षण में विफल रहने के बाद 16 जुलाई 2025 को एस्पिरिन टैबलेट आइपी को गुजरात में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ में उसी साल्ट की खरीद प्रक्रिया 17 जुलाई 2025 को आगे बढ़ाई गई। नईदुनिया ने लगातार ब्लैकलिस्टेड यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड कंपनी से दवा खरीद के मामले को उजागर किया है।पड़ताल से पता चला है कि यूनिक्योर कंपनी को दवाओं की घटिया गुणवत्ता के कारण गुजरात मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड (जीएमएससीएल) द्वारा ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) ने उसी अवधि में कंपनी को दवाओं की सप्लाई के लिए टेंडर जारी किए।जीएमएससीएल के रिकार्ड के अनुसार, यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन टैबलेट आइपी (75 एमजी और 150 एमजी) को 16 जुलाई 2025 से 15 जुलाई 2028 तक ब्लैकलिस्ट किया गया। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ में एस्पिरिन 325 एमजी टैबलेट के लिए 17 जुलाई 2025 को टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी।डियम वाल्प्रोएट पर भी विवाद सामने आया है। जीएमएससीएल ने यूनिक्योर कंपनी की सोडियम वाल्प्रोएट 200 एमजी टैबलेट को 26 जून 2025 से 25 जून 2027 तक प्रतिबंधित किया था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तिनिधिमंडल ने सोमवार को लोकभवन पहुंचकर सरकारी अस्पतालों में अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाओं की सप्लाई का आरोप लगाते हुए शिकायत सौंपी।कांग्रेस ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं छत्तीसगढ़ दवा निगम के अध्यक्ष दीपक महस्के ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी के संबंध में जांच कराई जाएगी। जो अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं,

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