नई दिल्ली, एजेंसी। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ 24 दिनों तक मोर्चा चलाने के बाद युवाओं को सोमवार को एक बड़ी सफलता मिली। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद सामने आकर कहा कि सरकार जेएसएससी सीजीएल की परीक्षाओं को रद्द कर रही है। साथ ही विवादों में आई परीक्षा कराने वाली संस्था- टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) की ओर से राज्य में 2014 के बाद से कराई गई परीक्षाओं की भी जांच की बात कही। हेमंत सोरेन के इस एलान के बाद से ही झारखंड में सरकारी भर्ती के लिए हुई परीक्षाओं के रद्द होने और इसके प्रभाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दरअसल, एसएससी-सीजीएल के रद्द होने से पहले ही झारखंड में नौकरियों से जुड़ चुके करीब दो हजार अभ्यर्थियों पर असर पड़ा है और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सरकार के इस फैसले का मंगलवार को युवाओं ने झारखंड सचिवालय को घेरकर विरोध किया। इनमें से कई अभ्यर्थियों का कहना था कि इतने समय तक नौकरी करने के बाद अचानक से संकट आ गया है।
अधिकतर लोगों की नई परीक्षा देने की उम्र या तो निकल गई है या फिर वे पहले ही कुछ बड़े अधिकारी पदों को छोड़कर आए थे और झारखंड में सरकारी भर्ती के बाद नौकरी कर रहे थे। ऐसे में पूर्व परीक्षाओं के नतीजे और भर्ती रद्द होने से उनके सामने मुश्किल खड़ी हो गई है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के आंदोलन और चौतरफा दबाव के बाद कैबिनेट की एक विशेष मैराथन बैठक में परीक्षा प्रणाली को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं।: सरकार ने पेपर लीक, डिजिटल नकल और अन्य गड़बड़ियों के आरोपों के बीच झारखंड कर्मचारी चयन आयोग- संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) को पूरी तरह रद्द करने का फैसला किया है।
1. टीडीपीएल की ओर से कराई गई परीक्षाएं रद्द: निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल की ओर से आयोजित की गईं सभी भर्ती परीक्षाओं, उनके घोषित परिणामों और किए गए चयनों को रद्द कर दिया गया है। इस एजेंसी के पास जेपीएससी और जेएसएससी की कई मुख्य परीक्षाओं का जिम्मा था। इसके अलावा एजेंसी के पास कुछ और भर्ती परीक्षाओं की जिम्मेदारी थी। कुल मिलाकर इस एजेंसी ने करीब 40 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं कराईं, जिन पर अब रद्द होने की तलवार लटक रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की है कि साल 2014 से राज्य में आयोजित की गईं सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की गहन जांच कराई जाएगी। यह कदम सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासों के बाद उठाया गया है।परीक्षा प्रणाली को मजबूत, पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय परीक्षा सुधार समिति का गठन किया गया है। यह समिति भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार के उपाय सुझाएगी।
2. भ्रष्टाचार रोधी कानून के जरिए सख्ती: सरकार ने परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों और अनुचित साधनों को रोकने के लिए बने कड़े कानून को राज्य में बेहद कड़ाई से लागू करने का संकल्प लिया है।छात्रों और विपक्षी दलों की एक प्रमुख मांग मामले की सीबीआई जांच कराने की थी। हालांकि, झारखंड सरकार ने इस मांग पर चुप्पी साधे रखी है और वह सीआईडी और विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच को ही आगे बढ़ा रही है।





