इंफाल। मणिपुर में जनगणना शुरू होने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अपडेट करने की मांग को लेकर ‘कैंपेन फार जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन’ (जेएफसी) द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के बंद से मंगलवार को राज्य के पांच जिलों में जनजीवन प्रभावित रहा।हड़ताल के कारण इंफाल पूर्वी, इंफाल पश्चिमी, थौबल, बिष्णुपुर और काकचिंग जिलों में बाजार बंद रहे, सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा हालांकि, कुछ निजी वाहन सड़कों पर दिखे। शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहे।मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने लोगों से बंद के बजाय विरोध-प्रदर्शन के वैकल्पिक तरीके अपनाने की अपील की।मुख्यमंत्री ने कहा, बंद का सबसे ज्यादा असर रोज कमाने-खाने वालों और छात्रों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें लोगों की इच्छाओं को जानती हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अमित शाह अक्टूबर में एनआरसी की मांग इसलिए की जा रही है, क्योंकि मैतेयी और नगा समुदाय के लोगों को आशंका से उठी थी कि एनआरसी के बिना जनगणना से राज्य में जनसांख्यिकीय बदलाव हो सकते हैं। पड़ोसी देश म्यांमार से अवैध प्रवासी राज्य में आ सकते हैं।केंद्र सरकार ने नागरिक समाज संगठनों की मांग को देखते हुए मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया को सोमवार को टाल दिया। राज्य में जनगणना की प्रक्रिया एक सितंबर से शुरू होनी थी।जेएफसी ने सोमवार देर रात जारी बयान में कहा कि राज्य सरकार द्वारा जनगणना प्रक्रिया टाले जाने की जानकारी देने के बावजूद वह अपना राज्यव्यापी बंद जारी रखेगा, क्योंकि जनगणना टाले जाने को लेकर अभी तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।सोमवार शाम मुख्यमंत्री सचिवालय ने बताया था कि नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद मणिपुर में जनगणना को टाल दिया गया है। बैठक में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।





