नेपाल, एजेंसी। नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में नदी किनारे के इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सड़कें बह गईं। बाजार तबाह हो गए। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई लोगों की तलाश जारी है। लेकिन इस तबाही के पीछे आखिर वजह क्या थी? यह सवाल अब सबसे बड़ा है।’द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। इस तबाही की वजह मूसलाधार बारिश नहीं है। विशेषज्ञों को शक है कि नेपाल की ओर से आए एक बड़े हिमस्खलन ने ल्हेन्डे नदी का रास्ता रोक दिया था। इसके बाद नदी में पानी जमा होता चला गया। जब यह बर्फीली रुकावट टूटी, तो पानी का सैलाब तबाही मचाते हुए नीचे की तरफ बह निकला।काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और वरिष्ठ जलवायु शोधकर्ता रिजान भक्त कायस्थ ने इस घटना पर जरूरी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह निष्कर्ष शुरुआती आंकड़ों पर आधारित है। इसके लिए नेपाल और चीन के वैज्ञानिकों से भी चर्चा की गई है। कायस्थ के मुताबिक, नेपाल की तरफ से गिरे हिमस्खलन ने ल्हेन्दे नदी को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था। इसके चलते नदी में पानी का भारी दबाव बन गया था।
तिब्बत में भूकंप और ग्लेशियर फटने का अंदेशा
घटना के समय एक और बड़ी हलचल दर्ज की गई। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक, सुबह 8:37 बजे तिब्बती इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया। यह जगह गोसाईंकुंड से करीब 47 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। प्रो. कायस्थ का कहना है कि क्या भूकंप की वजह से कोई ग्लेशियर झील फटी है, इसका सटीक पता लगाने में कुछ दिनों का समय लगेगा। इस संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इस पूरे इलाके में कई बड़ी ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब इस इलाके में ऐसी आपदा आई हो। पिछले साल आठ जुलाई 2025 को भी भोटेकोशी नदी में इसी तरह अचानक बाढ़ आ गई थी। उस समय जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने जांच की थी। तब सेंटिनल उपग्रह की तस्वीरों से साफ हुआ था कि रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास ल्हेन्डे नदी में बाढ़ ग्लेशियर झील फटने के कारण ही आई थी। कायस्थ का कहना है कि पिछले साल भी ल्हेन्डे नदी का रास्ता बंद हुआ था। इसलिए इस बार भी हिमस्खलन और झील फटने दोनों पहलुओं की जांच हो रही है।
नहीं हुई थी भारी बारिश : मौसम विभाग का दावा
वैज्ञानिकों ने इस बाढ़ के लिए मूसलाधार बारिश की बात को सिरे से नकार दिया है। कायस्थ का कहना है कि यह कोई सामान्य बाढ़ नहीं थी। जिस रफ्तार से पानी नीचे आया, उससे साफ है कि ऊपरी हिस्से में जमा पानी अचानक छूटा है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने भी अपनी विशेष रिपोर्ट में कहा है कि मंगलवार और बुधवार को रसुवा क्षेत्र में कोई भारी बारिश नहीं हुई थी। विभाग के अनुसार, बुधवार को भी तेज बारिश के आसार नहीं हैं और बारिश वाले बादल गुरुवार से ही बनेंगे।
चीन से मिले इनपुट और राहत कार्य
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की प्रवक्ता शांति महत ने भी हिमस्खलन की बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट’ को चीन की तरफ से यह शुरुआती जानकारी मिली थी। हालांकि, अभी तक आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है। महत के मुताबिक, फिलहाल सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को बचाने पर है।





