देहरादून : सीएम ने कहा, विपक्ष अब महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। जबकि लोकसभा में ही गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर किया था कि परिसीमन के माध्यम से किसी भी राज्य की सीटों के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, हमारी सरकार नारी शक्ति के हित में निर्णय लेते रहेंगे। जब तक महिलाओं को अधिकार नहीं मिल जाता है, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।नारी शक्ति अब केवल सहभागिता तक सीमित नहीं है, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही है। चंद्रयान मिशन से लेकर सेना, वायु सेना में अग्रिम पंक्ति के मोर्चों पर महिलाएं काम कर रही है। इसके साथ खेलों में भी अग्रणी भूमिका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए थे। इस ऐतिहासिक अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। यह प्रयास मातृशक्ति की संख्या बढ़ाने का प्रयास भर नहीं था, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया एक युगांतकारी कदम था। 2029 के लोकसभा चुनाव तक देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस ऐतिहासिक संकल्प को साकार करने की दिशा में निर्णायक प्रयास किया। परंतु विपक्षी दलों ने मिलकर इस ऐतिहासिक और युग परिवर्तनकारी पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया। विपक्षी दल के नेता तालियां बजा रहे थे, यह दृश्य को देखकर महाभारत की याद आ गई, जिसमें द्रौपदी का अपमान किया गया था।





