देहरादून। उत्तराखंड में मौसम के बदले मिजाज के बीच मूसलाधार वर्षा और जोरदार हिमपात से अप्रैल में कंपकंपी छुड़ा दी है। वर्ष 2020 के बाद उत्तराखंड के कई इलाकों में अप्रैल में एक दिन में सर्वाधिक वर्षा रिकार्ड की गई है। पर्वतीय जिलों में अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है। जबकि, मैदानी क्षेत्रों में भी पारे में भारी गिरावट दर्ज की गई।वर्षा-बर्फबारी के कारण जहां फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है, वहीं बर्फबारी के कारण चारधाम में यात्रा की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में आंशिक बादल छाने और गरज-चमक के साथ वर्षा होने के आसार हैं। मैदानी क्षेत्रों में मौसम शुष्क रह सकता है।बीते मंगलवार से ही उत्तराखंड के ज्यादातर क्षेत्रों में बादलों का डेरा रहा और हल्की बौछारों के दौर चलते रहे। इसके बाद देर रात पहाड़ से मैदान तक वर्षा का सिलसिला शुरू हुआ। देहरादून समेत कई क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक मूसलाधार वर्षा हुई। बुधवार को दोपहर बाद भी हल्की वर्षा का क्रम बना रहा। इस दौरान चंपावत में सर्वाधिक 85 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। इसके अलावा दून में भी 24 घंटे के भीतर करीब 20 मिमी वर्षा हुई।कुमाऊं के ज्यादातर क्षेत्रों में दिनभर झमाझम वर्षा होती रही। बदरीनाथ-केदारनाथ समेत चारों धाम, हेमकुंड साहिब, औली समेत तमाम चोटियों पर भर हिमपात के कई दौर हुए। वर्षा-बर्फबारी के कारण प्रदेशभर में शीत लौट आई। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट आने से कड़ाके की ठंड महसूस की गई।
अप्रैल में एक दिन के भी हुई यहा पांच वर्ष में सर्वाधिक वर्षा है। मौसम के तल्ख तेवर से प्रदेश के किसान व बागवानों की चिंता बढ़ गई। वर्षा और तेज हवाओं से रबी की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। जबकि, आम और लीची की बौर को भी क्षति पहुंची है।मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आज गुरुवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में आंशिक बादल छाने और गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा होने के आसार हैं। मैदानी क्षेत्रों में मौसम शुष्क रह सकता है। पहाड़ों में कहीं-कहीं आकाशीय बिजली चमकने और झोंकेदार हवाएं चलने को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है।





