ले ड्रम वाले साहिल-मुस्कान को मौत की सजा, पर फांसी होना तय नहीं

नई दिल्ली, एजेंसी। मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी पाए गए साहिल और मुस्कान को आज निचली अदालत की तरफ से मौत की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने इस मामले को जघन्य अपराध मानते हुए दोनों को ही मृत्युदंड देने का फैसला किया। इस फैसले के साथ ही अब भारत में मौत की सजा पाए लोगों के फेहरिस्त में दो और नाम जुड़ गए। ऐसा इसलिए, क्योंकि निचली अदालत की तरफ से साहिल-मुस्कान को मौत की सजा सुनाई जरूर गई है, लेकिन भारत के कानून के तहत अब भी यह तय नहीं है कि दोषी फांसी के फंदे तक पहुंचेंगे भी या नहीं और अगर पहुंचेंगे तो इसमें कितना समय लग सकता है। ऐसे में यह जानना अहम है कि मेरठ के जिस बहुचर्चित हत्याकांड में मौत की सजा का एलान हुआ है, उसके दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में अभी राज्य/शासन (स्टेट) के सामने कितनी अड़चनें हैं और मुस्कान-साहिल के पास अभी इस सजा से बचने के लिए कितने रास्ते हैं? इस मामले में कानून क्या कहता है? सजा से लेकर फांसी के फंदे तक पहुंचने की राह क्या है? अमर उजाला ने इस मुद्दे पर कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में वकील और कानूनी मामलों की जानकार आभा सिंह से बात की।

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