ट्रंप का दावा- ईरान ने 10 तेल टैंकर हमें उपहार के रूप में भेजे

वॉशिंगटन : पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से 10 तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति तोहफे के तौर पर दी है। इन सभी जहाजों पर पाकिस्तान के झंडे लगे हैं। उनके मुताबिक यह कदम इस बात का संकेत है कि तेहरान अब बातचीत के लिए गंभीर है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका का सैन्य अभियान तय समय से काफी आगे बढ़ चुका है और ईरान पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

तोहफे के बावजूद ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह जल्दी समझौता करे, नहीं तो उस पर और बम बरसाए जाएंगे। ट्रंप ने यह बयान तब दिया जब बृहस्पतिवार को एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि लगभग चार सप्ताह से चल रही लड़ाई को समाप्त करने का वाशिंगटन का प्रस्ताव एकतरफा और अनुचित है, लेकिन कूटनीति जारी है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, ईरानी अजीब हैं, बंद कमरे में समझौते की भीख मांगते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि वे हमारे प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। गलत, उन्हें जल्द गंभीर होना चाहिए। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और अगर ऐसा हुआ तो फिर लौटने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। बाद में, व्हाइट हाउस में कैबिनेट की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, ईरान के पास अब अपने परमाणु महत्वाकांक्षाओं को स्थायी रूप से त्यागने और एक नए रास्ते पर चलने का मौका है। हम देखेंगे कि वे ऐसा करना चाहते हैं या नहीं। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम उनके लिए सबसे बुरा सपना साबित होंगे। इस बीच, हम उन पर बमबारी करते रहेंगे।वहीं, ईरान के अधिकारी ने कहा, संघर्ष को समाप्त करने के लिए वाशिंगटन का नवीनतम प्रस्ताव हमने देखा और समीक्षा के बाद उसे खारिज कर दिया है। यह एकतरफा और अनुचित है और वाशिंगटन ने केवल अमेरिकी और इस्राइली हितों को साधने वाली शर्तें रखी है। अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, पाकिस्तान के माध्यम से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद तेहरान ने बुधवार रात को इसकी विस्तृत समीक्षा की, लेकिन पाया कि इसमें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक बुनियादी शर्तें मौजूद नहीं हैं। वैसे अधिकारी ने यह भी कहा, कूटनीति रुकी नहीं है और अगर वाशिंगटन से जमीन यथार्थ के आधार पर प्रस्ताव मिलता है तो आगे बढ़ने का रास्ता अब भी मिल सकता है। वैसे अभी तक बातचीत के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, इस स्तर पर बातचीत की कोई योजना व्यावहारिक नहीं लगती।


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