<p style=”text-align: justify;”><strong>Banks Cyber Security: </strong>दुबई में बैंक SMS या ईमेल के जरिए भेजे जाने वाले ओटीपी सिस्टम को खत्म कर देंगे. इसके बजाय, लोगों को डिजिटल ट्रांजैक्शन को अप्रूव या रिजेक्ट करने के लिए अपने बैंक के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”>धीरे-धीरे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के सभी बैंकों में इस बदलाव को अपनाया जा रहा है और इसकी डेडलाइन 31 मार्च, 2026 है यानी कि इस समय तक सभी बैंकों को ट्रांजैक्शन ऑथेन्टिकेशन के लिए SMS और ईमेल के इस्तेमाल को बंद करना होगा. यह निर्देश यूएई के सेंट्रल बैंक ने दिया है. </p>
<h3 style=”text-align: justify;”>क्यों लाया जा रहा यह बदलाव? </h3>
<p style=”text-align: justify;”>यह बदलाव सिक्योरिटी को और मजबूत बनाने और फ्रॉड के जोखिम को कम करने के लिए लाया जा रहा है क्योंकि बैंकिंग सिस्टम में साइबर अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. साइबर ठग फिशिंग और सिम-स्वैपिंग से लेकर रैंसमवेयर तक के लिए इसी ओटीपी का इस्तेमाल करते हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>लोकल न्यूज आउटलेट इमारात अल यूम के मुताबिक, सेंट्रल बैंक की तरफ से बैंकों को कहा गया है, यूएई के सेंट्रल बैंक के निर्देशों के आधार पर टेक्स्ट मैसेज या ईमेल के जरिए पासवर्ड भेजने का काम धीरे-धीरे बंद हो जाएगा. कस्टमर्स अब ‘ऑथेंटिकेशन वाया मोबाइल एप्लीकेशन फीचर’ को चुनकर स्मार्ट एप्लिकेशन के जरिए आसानी से इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन कर सकेंगे. </p>
<p style=”text-align: justify;”>UAE साइबर सिक्योरिटी काउंसिल के मुताबिक, यहां सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं से हर रोज 50,000 से ज्यादा साइबर अटैक की घटनाएं सामने आती हैं. यूएई के साइबर सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, 2024 में रैंसमवेयर हमलों में 32 परसेंट का उछाल आया है. रैनसमवेयर की घटनाएं भी 2023 में 27 से बढ़कर 2024 के जनवरी-नवंबर में 34 हो गईं. </p>
<h3 style=”text-align: justify;”>कस्टमर्स के लिए ये दो काम जरूरी </h3>
<p style=”text-align: justify;”>कुल मिलाकर अब जब आप डिजिटली ट्रांजैक्शन करेंगे, तो आपके बैंक ऐप पर नोटिफिकेशन आएगा. इसमें आपको ट्रांजैक्शन को अप्रूव या रिजेक्ट करने के लिए कहा जाएगा इसलिए बैंक ऐप का फोन पर इंस्टॉल होना और नोटिफिकेशन का टर्न ऑन होना जरूरी है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>साइबर अपराधी ओटीपी हाइजैक करने के लिए फिशिंग, सिम-स्वैपिंग या मैलवेयर जैसे तमाम हथकंडे अपनाते हैं. कई बार यूजर्स जाने-अनजाने में स्कैमर्स को कोड बता देते हैं, जिससे देखते ही देखते अकाउंट खाली हो जाता है या पैसा विदेश में ट्रांसफर कर दिया जाता है. </p>
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