वाशिंगटन। ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में दक्षिण कोरिया के साथ नहीं देने से नाराज बताए जा रहे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है।दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास को ऐन मौके पर स्थगित करने के बाद ट्रंप ने किम की तारीफ करते हुए कहा कि किम ने हमेशा उनका सम्मान किया है और उनके व्यवहार में उन्हें कुछ भी धौंसाने वाला नहीं लगा। उन्होंने कहा कि वह कोरियाई प्रायद्वीप को और सुरक्षित बनाना चाहते हैं।पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि वह और किम कई बार मिल चुके हैं और एक-दूसरे को समझते हैं। जब उनसे पूछा गया कि उनके हालिया बयान पर किम की कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई, तो ट्रंप ने कहा कि किम ने प्रतिक्रिया दी है, लेकिन उन्होंने इसका विवरण नहीं दिया।व्हाइट हाउस और संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के मिशन ने भी ट्रंप के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की।
दक्षिण कोरिया से बढ़ी दूरीट्रंप ने रविवार को पेंटागन को दक्षिण कोरिया के साथ लंबे समय से चले आ रहे संयुक्त युद्धाभ्यास को कम करने का निर्देश दिया था। माना जा रहा है कि पश्चिम एशिया में ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में दक्षिण कोरिया के शामिल होने से इन्कार से वह नाराज हैं।वहीं, उत्तर कोरिया इन युद्धाभ्यासों को लंबे समय से युद्ध की तैयारी बताते हुए उनका विरोध करता रहा है।इसी बीच उत्तर कोरिया और रूस की नजदीकी भी लगातार बढ़ रही है।उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने मंगलवार को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने उत्तर कोरिया के साथ मिलकर न्यायपूर्ण नई विश्व व्यवस्था बनाने की बात कही है।ट्रंप और किम की पहली मुलाकात 2018 में हुई थी।
इसके बाद 2019 में भी दोनों मिले, लेकिन उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों और प्रतिबंधों को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के साथ नए सिरे से बातचीत से किम को खास नुकसान नहीं होगा।रूस और चीन के साथ उसके संबंध पहले ही मजबूत हो चुके हैं और ट्रंप से मुलाकात से उसकी अंतरराष्ट्रीय साख बढ़ सकती है।पिछले साल किम की बहन किम यो जोंग ने भी कहा था कि उनके भाई और ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं, लेकिन अमेरिका अगर इन संबंधों के जरिए उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार खत्म कराने की उम्मीद करता है तो यह मजाक होगा।अमेरिका की पूर्व खुफिया अधिकारी सिडनी सीलर के मुताबिक, ट्रंप का मौजूदा कदम नया नहीं है।उन्होंने 2018 में भी किम के साथ बातचीत का माहौल बनाने के लिए अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास को स्थगित किया था। ऐसे में ट्रंप की ताजा पहल को विशेषज्ञ अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच फिर से वार्ता की संभावित भूमिका तैयार करने के प्रयास के तौर पर देख रहे हैं।





