कोच्चि (एजेंसियां) समंदर के अंदर अब हिंदुस्तान की ताकत और बढ़ गई है। नौसेन में डीएससी ए-20 के शामिल होने से भारत की ताकत में इजाफा हुआ है और भारत और शक्तिशाली हो गया है। भारतीय नौसेना ने कोच्चि स्थित नौसेना स्टेशन में बुधवार को आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) ए-20 को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया है। यह जहाज नौसेना की पानी के नीचे की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही अंडरवाटर मिशन को बखूबी अंजाम देने में सक्षम है।
डीएससी ए-20 की ताकत
डीएससी ए-20 श्रेणी का पहला जहाज है, जो समुद्र के भीतर जाकर ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है। यह एक ऐसा युद्धपोत है जो अंडरवॉटर मिशन, निरीक्षण और रिकवरी कार्यों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इससे तटीय क्षेत्रों में डाइविंग, अंडरवॉटर निरीक्षण और सैल्वेज भी किया जा सकता है। इसके कमीशन होने से नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता में काफी इजाफा हुआ है। डीएससी ए20 के सेवा में शामिल होने से गोताखोरी अभियान, बचाव एवं मलबा निकालने के काम जैसी पानी के नीचे की महत्वपूर्ण गतिविधियों को अंजाम देने की नौसेनिक क्षमता मजबूत होगी।
आत्मनिर्भर भारत का नमूना
डीएससी ए-20 जहाज गोताखोरी अभियानों, पानी के नीचे रखरखाव और बचाव अभियानों में मित्र देशों की सहायता करने की भारत की क्षमता को भी बढ़ाएगा। यह क्षेत्र में एक प्रथम उत्तरदाता और विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगा। डीएससी ए20 एक आधुनिक कैटामरन-हल वाला जहाज है, जो उन्नत डाइविंग सिस्टम, पानी के नीचे वीडियो के माध्यम से निरीक्षण करने और ट्रैकिंग सुविधाओं के साथ-साथ सुरक्षित गोताखोरी अभियानों के लिए टू-मैन रीकम्प्रेशन चैंबर से लैस है। यह बेहतर सहनशक्ति और गतिशीलता के साथ, इस क्राफ्ट से नौसेना के समुद्री सुरक्षा ढांचे को महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है।





