नई दिल्ली, एजेंसी। भारत अपनी स्वतंत्रता के 80 साल पूरे होने के अवसर पर जश्न मना रहा है। 1947 में मिली आजादी के बाद से हर साल देश का मुख्य समारोह लाल किले पर होता है। आज पीएम मोदी ने लाल किले पर ध्वजारोहण करने के बाद परेड की सलामी ली। प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से 13वीं बार देशवासियों को संबोधित किया। प्रधानमंत्री का संबोधन करीब 76 मिनट तक चला। इसमें उन्होंने उनकी सरकार में देश में हुई प्रगति का जिक्र किया।
लाल किले की प्राचीर से संबोधन के बाद वंदे मातरम और राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का औपचारिक समापन हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों से मिले। प्रधानमंत्री को अपने बीच देखकर बच्चे काफी खुश नजर आ रहे थे। इसी दौरान पैर छूने के एक लिए बेटी झुकी तो उसकी टोपी गिर गई, प्रधानमंत्री ने जमीन पर गिरी टोपी उठाकर दोबारा बच्ची के सिर पर रखी।प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने लाल किले से पंच प्राण की बात की थी। इसने हमारे संकल्पों को बड़ा बल दिया। जिस भारत का सपना, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बिरसा मुंडा, ज्योतिबा फुले ने देखा था। आइये इन संकल्पों को हम दोहराएं। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा कि समय हमारा है, अवसर हमारा है, संकल्प हमारा है। “आइये सपनों को संकल्प बनाएं, संकल्प को सामर्थ्य बनाएं और सामर्थ्य को सफलता में बदल कर रहें। आइये हर कदम को विकास का कदम बनाएं, कदम से कदम मिलाएं, मन से मन मिलाएं, लक्ष्य से जुड़े रहें, एक दीप से जलें दीप हजारों, आओ मिलकर विकसित भारत बनाएं।”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबधन में कहा, आज मुझे एक काम के लिए आपकी मदद चाहिए। सभी नौजवानों से मैं चाहता हूं कि आप नेतृत्व करिए। आपका एक या दो घंटे देश को बहुत बड़ी शक्ति देने वाला है। इन दिनों में देश में जनगणना का काम हो रहा है। गिनती सिर्फ आंकड़ों से बात बनती नहीं है। उसकी बारीकियों से योजनाएं बनती हैं, देश के आगे बढ़ने की रूप रेखा तैयार होती है। कभी कभी सरकार के प्रतिनिधि जल्दी में होते हैं, वे कुछ गड़बड़ी कर देते हैं। इस बार निर्णय हुआ है कि आप अपनी जानकारी जनगणना में भरकर दे सकते हैं। लेकिन आप परिवार के सब बैठकर डिजिटली अपनी रजिस्ट्री करा दें। आप जितनी परफेक्ट जानकारी देंगे, देश को उससे आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। इससे देश की समय और शक्ति काम आएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा, हमें देश की सुरक्षा के लिए नागरिकों को भी आगे लाना है। मैं लाल किले से एलान कर रहा हूं कि हम जल्द ही नागरिक रक्षा (सिविल डिफेंस) का देश में एक बड़ा नेटवर्क खड़ा करेंगे, जो आधुनिक चुनौतियों का सामना करेगा। इसमें युवाओं की बड़ी भागीदारी होगी।प्रधानमंत्री ने कहा, देश की सत्ता में वर्षों तक माओवादी सोच वाले लोग जगह बनाकर बैठे थे। इन लोगों ने सरकारों की नीतियों को भी प्रभावित किया था। हमें नक्सलवादियों से देश को आजाद कराने में मदद मिली है। हथियार वाले नक्सल तो गए लेकिन दिमाग वाले नक्सल देश में हैं। यह देश को हिंसा में घसीटने की कोशिश में जुटे हैं। हमें इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा। इन्हें अलग-थलग करना होगा। सुरक्षित भारत बनाना हमारा दायित्व है। सुरक्षा सीमा के अंदर हो या बाहर हम सबके लिए तैयार हैं। जरूरी नहीं कि युद्ध सीमाओं पर हो, आज तेल रिफाइनरियों पर हमले हो रहे हैं, बैंकिग क्षेत्र हमलों का शिकार हो रहे हैं। हमें इन क्षेत्रों की सुरक्षा भी करनी है।





