नरौरा/बुलंदशहर : जब लक्ष्मी नारायण का शव गांव लाया गया तो वहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव की परंपरा और घर के भारी माहौल को देखते हुए परिजनों ने निर्णय लिया कि दोनों शवों को अलग-अलग समय पर अंतिम विदाई दी जाए। पिता का शव पहुंचने से ठीक पहले ममता की अंतिम यात्रा निकाली गई। बाद में लक्ष्मी नारायण की अर्थी उठी। यूपी के बुलंदशहर स्थित नरौरा थाना क्षेत्र में बेलोन टोल प्लाजा के निकट रविवार रात सांड़ से बाइक टकराने से रामघाट निवासी पूर्व ग्राम प्रधान के पति लक्ष्मी नारायण की मृत्यु हो गई। मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची तो उनकी 17 वर्षीय बेटी सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने भी दम तोड़ दिया। सोमवार को जब एक ही आंगन से पिता और पुत्री की अर्थियां उठीं तो पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। रामघाट के गंगा तट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।
लक्ष्मी नारायण कॉलेज में थे चौकीदार
रामघाट निवासी लक्ष्मी नारायण रावल (55) डिबाई स्थित मथुरिया इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वह कॉलेज परिसर में ही चौकीदार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी पत्नी कृष्णा देवी रामघाट की पूर्व ग्राम प्रधान रह चुकी हैं, जिसके चलते परिवार का क्षेत्र में काफी सम्मान था। रविवार देर शाम लक्ष्मी नारायण ड्यूटी पर जाने के लिए घर से बाइक से निकले थे।पोस्टमार्टम के बाद जब लक्ष्मी नारायण का शव गांव लाया गया तो वहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव की परंपरा और घर के भारी माहौल को देखते हुए परिजनों ने निर्णय लिया कि दोनों शवों को अलग-अलग समय पर अंतिम विदाई दी जाए। पिता का शव पहुंचने से ठीक पहले ममता की अंतिम यात्रा निकाली गई। बाद में लक्ष्मी नारायण की अर्थी उठी। रामघाट के गंगा तट पर एक ओर पिता की चिता सजी थी और दूसरी ओर उनकी लाडली बेटी की। छोटे पुत्र ललित रावल (18) ने पहले बहन ममता को और फिर पिता लक्ष्मी नारायण को मुखाग्नि दी।





