नई दिल्ली, एजेंसी। पेंटागन अमेरिकी रक्षा उद्योग पर हथियारों का उत्पादन तेजी से बढ़ाने का दबाव बना रहा है, ताकि घट चुके गोला-बारूद के भंडार को फिर से भरा जा सके। इसमें वे हथियार भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल ईरान के साथ हालिया लड़ाई के दौरान किया गया था। अमेरिकी रक्षा विभाग का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब मिसाइल इंटरसेप्टर समेत कई अहम हथियारों के भंडार में बड़ी गिरावट की चिंता जताई जा रही है।ईरान के साथ हालिया संघर्ष में अमेरिकी मिसाइल इंटरसेप्टर और अन्य गोला-बारूद के इस्तेमाल से हथियारों का भंडार काफी घट गया है। इसी चिंता के बीच पेंटागन ने रक्षा कंपनियों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और हथियारों की डिलीवरी में तेजी लाने की योजना मांगी है। कंपनियों को 21 दिनों के भीतर अपनी योजनाएं देने को कहा गया है। पैट्रियट और THAAD जैसे अहम एयर डिफेंस इंटरसेप्टर के घटते स्टॉक ने अमेरिका के सामने अपने रक्षा भंडार को तेजी से फिर से भरने की चुनौती खड़ी कर दी है।पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने शनिवार को एक बयान में कहा कि रक्षा विभाग गोला-बारूद की खरीद बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रहा है, ताकि ‘हमारे सैनिकों को जरूरत और खतरे के मुताबिक तेजी से हथियार उपलब्ध कराए जा सकें।
उन्होंने पिछले हफ्ते इस प्रक्रिया में तेजी लाने के विभाग के प्रयासों की पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह कदम रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जो पांच महीने पुराने संघर्ष से पहले ही शुरू हो चुका था।’द वॉशिंगटन पोस्ट’ को मिले एक मेमो के अनुसार, डिप्टी डिफेंस सेक्रेटरी स्टीव फीनबर्ग ने बुधवार को रक्षा उद्योग के नेताओं को पत्र लिखकर उनसे महत्वपूर्ण क्षमताओं के लिए डिलीवरी शेड्यूल को ‘काफी तेज और आक्रामक’ बनाने और/या उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं जमा करने को कहा है। कंपनियों को यह योजना तैयार करने के लिए 21 दिनों से ज्यादा का समय नहीं दिया गया है। फीनबर्ग ने पत्र में लिखा हमें अपने कार्यक्रमों की समय सीमा तेजी से आगे बढ़ानी होगी और अभी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी। एक नए विश्लेषण के अनुसार, यह मेमो ऐसे समय में आया है, जब ईरान के साथ हालिया लड़ाई में अमेरिकी सेना के उन्नत मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार और कम हो गया है। इससे यह चिंता बढ़ गई है कि अगर लड़ाई दोबारा शुरू होती है, तो अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा और बढ़ सकता है। वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज’ (CSIS) के विश्लेषण के मुताबिक, पैट्रियट और THAAD इंटरसेप्टर के घटते भंडार के कारण अमेरिका और उसके मध्य-पूर्वी सहयोगियों को अपने एयर डिफेंस सिस्टम की सुरक्षा के लिए अधिक जोखिम उठाना पड़ सकता है।
कम मिसाइलें होने पर अमेरिकी एयर डिफेंस के सामने क्या चुनौती होगी?
CSIS के विश्लेषण में कहा गया है कि अमेरिकी सेना ईरान की ओर से आने वाले ड्रोन और मिसाइलों के खिलाफ कम संख्या में इंटरसेप्टर दाग सकती है। इसका सीधा असर एयर डिफेंस की प्रभावशीलता पर पड़ सकता है और आने वाली मिसाइलों या ड्रोन के बच निकलने की संभावना बढ़ सकती है।





