नई दिल्ली, एजेंसी। अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती हुए अग्निवीरों के लिए बड़ी खबर है. अब चार साल की सेवा पूरी होने के बाद उन्हें दो साल और सेना में काम करने का मौका मिलेगा यानी अग्निवीरों का कुल सेवा कार्यकाल चार साल से बढ़कर छह साल होगा.इसके अलावा 6 साल बाद भी वे इंडियन डिफेंस सर्विसेज के लिए अप्लाई कर सकेंगे.केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने एक प्रेस कांफ्रेंस में इसकी जानकारी दी.उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत पहले बैच के करीब 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा.
इस फैसले से उन अग्निवीरों को राहत मिलेगी जिन्हें चार साल की सेवा पूरी होने के बाद दिसंबर 2026 में सेना से बाहर होना था हालांकि दो साल का यह एक्सटेंशन लेना पूरी तरह अग्निवीरों की इच्छा पर निर्भर करेगा. किसी भी अग्निवीर को अतिरिक्त दो साल तक सेवा जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. इस अवधि के बाद जो अग्निवीर नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होना चाहेंगे और चयन के तय मापदंडों पर खरे उतरेंगे उन्हें स्थायी कैडर में शामिल होने का मौका मिल सकता है.
18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल हो रहा पूरा
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के करीब 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक पूरा होने वाला है. मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक इन अग्निवीरों को 31 दिसंबर 2026 तक सशस्त्र बलों से बाहर होना था. अब दो साल के अतिरिक्त सेवा कार्यकाल की व्यवस्था से उनके सामने सेना में बने रहने का एक और विकल्प खुल सकता है.पहले बैच में थल सेना, वायुसेना और नौसेना को मिलाकर कुल करीब 24,400 अग्निवीरों की भर्ती हुई थी. इनमें लगभग 19,000 अग्निवीर थल सेना, 2,850 वायुसेना और 2,550 नौसेना में शामिल हुए थे. योजना के शुरुआती नियमों के अनुसार इनमें से करीब 75 फीसदी अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद वापस जाना था. अब इसी 75 फीसदी हिस्से को दो साल अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलेगा.
नई व्यवस्था में सबसे अहम बात यह है कि दो साल का सेवा विस्तार अनिवार्य नहीं होगा. अग्निवीर अपनी इच्छा के अनुसार तय कर सकेंगे कि वे चार साल की सेवा के बाद वापस जाना चाहते हैं या दो साल और सशस्त्र बलों में काम करना चाहते हैं यानी अतिरिक्त दो साल की सेवा का विकल्प अग्निवीरों को दिया जाएगा. इस अतिरिक्त अवधि के बाद नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होने के इच्छुक अग्निवीरों को चयन प्रक्रिया और निर्धारित मापदंडों पर खरा उतरना होगा. केवल दो साल का एक्सटेंशन मिलने से कोई अग्निवीर अपने आप स्थायी सैनिक नहीं बन जाएगा. नियमित कैडर में शामिल होने के लिए चयन जरूरी होगा.





