नई दिल्ली, एजेंसी। भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि अपने यहां हिरासत में बंद 13 सिविल कैदियों (जिनके भारतीय होने की संभावना है) को तुरंत कूटनीतिक पहुंच प्रदान करे। ये 13 व्यक्ति लंबे समय से पाकिस्तान में बंद हैं, लेकिन पाकिस्तान ने अब तक उन्हें भारतीय दूतावास के अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं दी है।भारत और पाकिस्तान हर छह महीने पर (एक जनवरी और एक जुलाई को) राजनयिक चैनलों के माध्यम से एक-दूसरे की हिरासत में बंद सिविल कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान करते हैं। यह 2008 के कूटनीतिक पहुंच समझौते के तहत किया जाता है।कूटनीतिक पहुंच का मतलब है कि पाकिस्तान सरकार भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को इन कैदियों से मिलने की अनुमति दे, ताकि उनकी स्थिति जांची जा सके और कानूनी मदद दिलाई जा सके।भारत का कहना है कि इन 13 व्यक्तियों की पहचान भारतीय या भारतीय होने की संभावना होने के बावजूद पाकिस्तान उन्हें यह बुनियादी अधिकार नहीं दे रहा है, जो मानवीय दृष्टि से गंभीर मुद्दा है।
भारत ने इन कैदियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करने की भी मांग की है, ताकि उनकी रिहाई और स्वदेश वापसी तक उन्हें कोई परेशानी न हो।भारत सरकार लगातार पाकिस्तान से सिविल कैदियों, मछुआरों और उनके नावों तथा लापता भारतीय रक्षा कर्मियों की शीघ्र रिहाई और स्वदेश वापसी की मांग कर रही है। भारत ने विशेष रूप से उन 188 भारतीय मछुआरों और सिविल कैदियों की रिहाई में तेजी लाने को कहा है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।सरकार के निरंतर प्रयासों से 2014 से अब तक 2,661 भारतीय मछुआरे और 78 भारतीय सिविल कैदी पाकिस्तान से वापस लाए जा चुके हैं। इसमें 2023 से अब तक 500 मछुआरे और 20 सिविल कैदी शामिल हैं। वैसे सूचियों के आदान प्रदान के बावजूद कैदियों की रिहाई की प्रक्रिया अक्सर धीमी रहती है।





