पीक सीजन में पहुंच रही भीड़ के लिए कम पड़ रहे हैं उत्तराखंड के धामों में उपलब्ध संसाधन

देहरादून : रिपोर्ट में भूस्खलन के जोखिम करने, शुल्क के साथ पंजीकरण करने, शौचालयों की संख्या बढ़ाने समेत कई सिफारिश की गई हैं।शासन को सौंपी रिपोर्ट में बताया गया कि इन धार्मिक स्थलों में पीक सीजन में श्रद्धालुओं के ठहरने और वाहन पार्किंग की समस्या हो रही है। भीड़ के कारण सभी धाम ओवरलोड हो रहे हैं, जिससे कूड़ा निस्तारण और शौचालय की सुविधा भी कम पड़ जा रही है। पीसीबी ने वर्ष-2024 में डब्ल्यूआईआई को धामों की धारण क्षमता का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद डब्ल्यूआईआई ने धामों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या, वहां पर ठहरने की क्षमता, पानी, स्वास्थ्य, सुरक्षा व्यवस्था, वाहन पार्किंग, आवागमन घोड़े-खच्चरों की संख्या और उनकी देखभाल समेत कई बिंदुओं पर अध्ययन किया। एक साल तक किए गए अध्ययन के बाद रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है।रिपोर्ट में बताया गया कि केदारनाथ में  हर घंटे 20 से 30 हेलिकॉप्टर उड़ते हैं। इनका शोर 50 डेसीबल से अधिक होता है। जबकि 40 डेसीबल से अधिक की आवाज से वन्यजीव प्रभावित होते हैं। इसमें वन्यजीवों पर पड़ने वाले कई प्रभावों का जिक्र किया गया है। गंगोत्री में रात में भारी वाहनों की आवाजाही रहती है।धामों में 24 तरह के अपशिष्ट निकलते हैं। अन्य स्थलों की तुलना में गंगोत्रीधाम और हेमकुंड साहिब में अपशिष्ट संग्रहण की व्यवस्था ठीक मिली है, पर वहां अपशिष्ट प्रसंस्करण की व्यवस्था ठीक नहीं है। केदारनाथ और यमुनोत्री में कूड़े को एकत्र करना और प्रसंस्करण दोनों बेहतर नहीं मिले हैं।

गंगोत्री व यमुनोत्री में कचरे को जलाया जा रहा था। गंगोत्री में कूड़ा जलाने वाला संयंत्र भागीरथी ईको-सेंसिटिव जोन में था। पीसीबी ने जुलाई 2025 के बाद संयंत्र का संचालन बंद कराया था। इसी प्रकार यमुनोत्री का इंसीनरेटर भी यमुनोत्री हिमनद के पास बना हुआ है। केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, यमुनोत्री में स्थित कचरा निस्तारण स्थल वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। अन्य की तुलना में यमुनोत्री में कचरा प्रबंधन सबसे खराब मिला है।रुद्र प्वाइंट से केदारनाथ के बीच सार्वजनिक शौचालय की क्षमता 2460 लोगों (रोटेशन के आधार पर) की है। रिपोर्ट में खुले में बढ़ते शौच की बात भी सामने आई है। वाहन पार्किंग की कमी का भी उल्लेख किया गया है। केदारनाथ धाम में 1054 वाहन पार्किंग की सुविधा है, जबकि पीक सीजन में कई किमी तक सड़क पर वाहन खड़े होते हैं। खच्चरों के जरिये रात में भी यात्रा करने, खच्चरों पर क्रूरता की बात कही गई है। धामों में कहीं भी वाइल्ड लाइफ प्रूफ डस्टबिन नहीं हैं। शासन व पीसीबी के अधिकारियों ने डब्ल्यूआईआई से ड्राफ्ट रिपोर्ट मिलने की बात कही। 

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