नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को कहा कि दोनों देश बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम देने के करीब है और जल्द ही यह समझौता हो सकता है। यह दोनों के लिए लाभदायक और टिकाऊ होगा और आपसी हितों को आगे बढ़ाएगा। वार्ता के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूबियो के समक्ष डोनल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ग्रीन कार्ड समेत वीजा एवं आव्रजन नीतियों में किए गए बदलावों पर भारत की चिंताओं को रखा और कहा कि इस नए दृष्टिकोण से विधि सम्मत आवाजाही पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ना चाहिए।रूबियो-जयशंकर के बीच कई मुद्दों पर हुई बातरूबियो ने रविवार को जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत की। इसका मुख्य जोर व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और रक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर था।
जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, “हमारे व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द यहां आएंगे। हाल में भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में था। हमने जबरदस्त प्रगति की है।’जयशंकर ने कहा, ‘हमने आपसी और परस्पर लाभकारी व्यापार से जुड़े अंतरिम समझौते के अंतिम मसौदे को जल्द से जल्द पूरा करने के महत्व पर बात की है। यह व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।”ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का उद्देश्य दृष्टिकोण को फिर संतुलित करना’ रूबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति का उद्देश्य वैश्विक व्यापार के प्रति अमेरिका के समग्र दृष्टिकोण को फिर संतुलित करना है, न कि किसी विशेष देश को निशाना बनाना।
पुनर्संतुलन संतुलन के जरिये हम दुनियाभर में ऐसे व्यापारिक समझौते करना चाहते हैं, जो अमेरिका के साथ-साथ व्यापारिक साझीदारों के लिए भी अच्छे हों। उम्मीद है कि इन साझीदारों में से एक भारत भी होगा।रूबियो ने भारत को एक विशाल अर्थव्यवस्था और अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों में से एक बताया। रूबियो ने अमेरिका समर्थित ‘पैक्स सिलिका’ पहल में भारत के शामिल होने का भी जिक्र किया। दिसंबर में शुरू हुई इस पहल का मकसद अहम खनिजों व एआइ के लिए एक सुरक्षित, मजबूत और इनोवेशन पर आधारित आपूर्ति शृंखला तैयार करना है।चीन और पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती गर्मजोशी के बारे में रूबियो ने कहा कि वॉशिंगटन दूसरे देशों के साथ अपने जुड़ाव को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता। अमेरिका दुनियाभर के देशों के साथ रणनीतिक स्तर पर और कई दूसरे तरीकों से काम करता है; भारत समेत जिम्मेदार राष्ट्र यही करते हैं।एक अलग सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि जहां अमेरिका अपनी विदेश नीति को “अमेरिका फर्स्ट” के आधार पर आगे बढ़ा रहा है, वहीं भारत का दृष्टिकोण “इंडिया फर्स्ट” है।





