देवप्रयाग। संगम नगरी देवप्रयाग से सटे बेली के आरक्षित जंगल आग की चपेट में आ गया है। इससे जहां बहुमूल्य वन संपदा स्वाहा हो गई। वहीं बड़ी संख्या में वन्यजीवों को भी नुकसान हुआ है। वन विभाग की टीमें आग पर काबू पाने के लिए पूरी मशक्कत से जुटी हैं।रविवार को महड़ क्षेत्र के पौखाल के खेतों में ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आड़े की आग देर रात तेजी से फैलते हुए बेली के आरक्षित जंगल तक पहुंच गई।भागीरथी तट से चोटी तक फैली आग पहाड़ के दोनों तरफ करीब चार किमी देवप्रयाग-टिहरी मार्ग स्थित सुंदरनगर तक फैल गई।धूं-धूंकर जलते जंगलों से जहां तापमान में बढ़ोतरी हो गई है। वहीं, नदी घाटी भी धुएं से भर गई। इससे तीर्थनगरी में आने वाले तीर्थयात्रियों, पर्यटकों की भी मुश्किल बढ़ गई हैं।वन क्षेत्राधिकारी एमएस रावत ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग की 19 सदस्यीय टीम रविवार रात से ही जुटी हैं।टीम ने देवप्रयाग नगर की ओर फैल रही आग को नियंत्रित कर लिया है, जबकि तेज हवाओं से भागीरथी तट की ओर फैली आग को बुझाने में वन कर्मी जुटे हैं।उनके अनुसार ग्रामीणों को खेतों में खरपतवार सावधानी से जलाने की हिदायत दी जा रही है। बेली का जंगल मवेशियों के घास पत्ती का मुख्य जरिया रहा है। वहीं, लोग यहां से लकड़ी भी लाते हैं।





