साल का पहला चंद्र ग्रहण आज़

नई दिल्ली, एजेंसीधार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण की ऊर्जा में बदलाव आता है और नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसका असर गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु पर अधिक पड़ सकता है। मान्यता है कि ग्रहण के समय चंद्रमा की किरणें शुद्ध नहीं मानी जातीं, इसलिए इस अवधि में अनावश्यक बाहर निकलने या सीधे चंद्रमा को देखने से बचना चाहिए। चंद्र ग्रहण सूर्य की राशि सिंह में लगेगा। इस दिन चंद्रमा की केतु से युति होगी और ग्रहण योग भी बनेगा। वहीं शुक्र मीन राशि और सूर्य, बुध, मंगल व राहु शनि की राशि कुंभ में रहेंगे। ऐसे में ग्रहों का विशेष प्रभाव सभी राशियों पर नजर आने वाला है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण का समय बेहद संवेदनशील और ऊर्जा परिवर्तन का काल माना जाता है। इस दौरान वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जाती है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

सूतक काल कब से कब तक रहेगा ?

ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। चंद्र ग्रहण के शुरू होने से 9 घंटे पहले सूतक लग जाएगा। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। सूतक काल 3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रारंभ होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक चलेगा। इस दौरान खाने-पीने से लेकर पूजा-पाठ तक कई कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। 

भारत में चंद्र ग्रहण सबसे पहले कहां दिखेगा

ऐसा माना जा रहा है कि, चंद्र ग्रहण सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश देखा जाएगा। यहां के तेजू नगर में चंद्रोदय शाम 5 बजकर 3 मिनट पर है। ऐसे में पहले आज चंद्र ग्रहण यहां देखा जा सकेगा।

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