यूक्रेन ने रुस की तेल रिफाइनरियों पर हमले किए तेज़

कीव,एजेंसी यूक्रेन के रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों में वृद्धि के कारण रूस में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँच गई हैं जबकि सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए पेट्रोल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन रूसी युद्ध मशीनों को नुकसान पहुँचाने के लिए रिफाइनरियों, पंपिंग स्टेशनों और ईंधन ट्रेनों पर ड्रोन हमलों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है साथ ही रूस में दैनिक जीवन को भी बाधित करने की कोशिश कर रहा है। गर्मियों में रूस के ड्राइवरों और किसानों के बीच पेट्रोल की माँग चरम पर होती है।
सीएनएन द्वारा किए गए हमलों की गणना के अनुसार यूक्रेनी ड्रोन ने अकेले इस महीने कम से कम 10 प्रमुख रूसी ऊर्जा संयंत्रों पर हमला किया है।
यूक्रेन की खुफिया सेवा के अनुसार जिन रिफाइनरियों पर हमला किया गया है उनमें सालाना 44 मिलियन टन से ज़्यादा उत्पाद उतारे हैं जो रूस की क्षमता का 10 प्रतिशत से भी ज़्यादा है और यह रणनीति कारगर होती दिख रही है।
यूक्रेन के मानवरहित प्रणालियों के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवडी के अनुसार इन लक्ष्यों में दक्षिणी रूस की सबसे बड़ी वोल्गोग्राद स्थित विशाल लुकोइल रिफ़ाइनरी, दक्षिणी रूस में स्थित सारातोव में एक बड़ी रिफ़ाइनरी और रोस्तोव क्षेत्र में स्थित एक और रिफ़ाइनरी शामिल है।
कई रूसी क्षेत्रों और क्रीमिया में ईंधन की कमी की खबरें आ रही हैं। रूस द्वारा नियुक्त गवर्नर सर्गेई अक्स्योनोव ने गैसोलीन की कमी के लिए “लॉजिस्टिक्स संबंधी समस्याओं” को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि सरकार “आवश्यक मात्रा में ईंधन ख़रीदने और कीमतों को स्थिर करने के लिए हर संभव उपाय कर रही है।”
यूक्रेन की विदेशी खुफिया सेवा ने पिछले गुरुवार को एक रिपोर्ट में कहा कि रूसी कंपनियां घरेलू कमी को दूर करने के लिए बेलारूस से तत्काल तेल खरीद रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार यूक्रेन रूस के तेल निर्यात में भी बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। पिछले हफ्ते उसके ड्रोन ने द्रुज़्बा पाइपलाइन पर हमला किया जो हंगरी और स्लोवाकिया को रूसी तेल की आपूर्ति करती है।
दोनों देशों ने यूरोपीय संघ से शिकायत करते हुए कहा कि “इन हमलों से यूक्रेन मुख्य रूप से रूस को नहीं, बल्कि हंगरी और स्लोवाकिया को नुकसान पहुँचा रहा है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टरबन को एक लिखित नोट में कहा कि वह इस व्यवधान से “बहुत नाराज़” हैं।

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