नई दिल्ली, एजेंसी।ईरान को लेकर मनमुताबिक परिणाम अभी तक नहीं निकलने और कारोबारी साझेदार देशों को टैरिफ से डरा कर घरेलू राजनीति में फंस चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अगले दो हफ्ते कुछ ज्यादा बेचैनी वाले साबित हो सकते हैं।वजह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अगले एक पखवाड़े के भीतर दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक साथ नजर आने वाले हैं।कहां होगी तीनों नेताओं की मुलाकात?अगले सप्ताह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन (31 अगस्त-1 सितंबर) और उसके तुरंत बाद 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, में तीनों नेताओं की उपस्थिति लगभग तय मानी जा रही है। जानकार मान रहे हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप के रणनीतिकारों के लिए उक्त दोनों बैठकें असहज संदेश देने वाला है।विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया मास्को यात्रा के दौरान पुतिन ने मोदी से एससीओ में मुलाकात की आशा व्यक्त की, जबकि ब्रिक्स के लिए भी उनके आने की संभावना मजबूत है।राष्ट्रपति शी भी दोनों मंचों पर मौजूद रह सकते हैं। राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन्होंने एससीओ के हर शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया है। ब्रिक्स की मेजबानी भारत कर रहा है और शी वर्ष 2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे।ये मुलाकातें महज प्रोटोकोल नहीं हैं। इन तीनों देशों को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में सबसे अहम किरदार निभाने वाले देशों में माना जाता है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार असंतुलन, वैश्विक शासन सुधार और ग्लोबल साउथ के हितों पर भारत, रूस और चीन के बीच अलग अलग स्तर पर साझा रणनीति बन रही है।उदाहरण के तौर पर, अमेरिका व पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत लगातार रूस से तेल व उर्वरक खरीद रहा है। आपसी तनाव के बावजूद भारत व चीन के बीच आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहे हैं। मोदी और चिनफिंग के बीच एक और द्विपक्षीय बैठक की तैयारी चल रही है। तीनों देश ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों को वैकल्पिक वैश्विक संस्थानों को मजबूत कर रहे हैं।





