नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में पिछले महीने आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद कई भारतीय परिवार अब भी अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। जैसे जैसे दिन बीतता जा रहा है, लापता लोगों के बारे में सूचना मिलने की संभावना भी क्षीण होती जा रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने बताया है कि आपदा प्रभावित इलाकों में 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लापता लोगों की जानकारी जुटाने के लिए भारत सरकार नेपाल सरकार के स्थानीय विभागों और एजेंसियों के संपर्क में है। साथ ही उन भारतीय राज्य सरकारों से भी बातचीत चल रही है, जिनके नागरिक नेपाल गए थे।जायसवाल ने आगे बताया कि चीन के रास्ते नेपाल में 1907 भारतीय प्रवेश कर चुके हैं और अब चीन में कोई भारतीय नहीं बचा है।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों से 166 भारतीयों को बचाया जा चुका है। ये सभी सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं।इस दौरान उन्होने स्पष्ट किया कि चीन की तरफ से 49 भारतीयों के लापता होने की सूचना दी गई है और वो सभी भारत की तरफ से जारी 275 लोगों की सूची में शामिल है।बताते चलें कि नेपाल सरकार की एजेंसी एनडीआरआरएमए के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 1287 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। करीब 5,083 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें लगभग 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं।एजेंसी ने यह भी बताया है कि सबसे अधिक शव चितवन, नवलपरासी, नुवाकोट और रसुवा जिलों से मिले हैं। बचाव अभियान जारी है और अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।भारत लगातार निभा रहा अपना पड़ोसी धर्मदूसरी तरफ, भारत लगातार राहत सामग्री, चिकित्सा और विशेष बचाव टीमें नेपाल भेज रहा है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास खोज और पहचान के काम में जुटा है।
इस आपदा के बाद नेपाल की तरफ से भारत, चीन व अमेरिका पर जलवायु परिवर्तन में सबसे योगदान करने की वजह से मुआवजा मांगे जाने संबंधी सवाल पर प्रवक्ता जायसवाल ने कहा कि एक करीबी मित्र के नाते हम लगातार नेपाल को जरूरी मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।जायसवाल ने आगे कहा कि जहां तक जलवायु परिवर्तन का सवाल है तो यह पूरी दुनिया के लिए चुनौती है और भारत का मानना रहा है कि इस सभी देश मिल कर ही लड़ सकते हैं। विकसित देश एतिहासिक तौर पर सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाया है और इसे कम करने के अभियान का उन्हें ही नेतृत्व करना चाहिए।





