नई दिल्ली, एजेंसी। ₹2,000 से अधिक के कुछ यूपीआई व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने के फैसले को लेकर उठे सवालों के बीच वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस निर्णय के पीछे किसी तरह का विदेशी प्रभाव नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले भारत अपने स्तर पर लेता है।मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह दावा गलत है कि यूपीआई पर एमडीआर लगाने का फैसला किसी विदेशी दबाव के कारण लिया गया है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा डिजिटल भुगतान तंत्र तैयार करना है, जो लंबे समय तक टिकाऊ, समावेशी और किफायती बना रहे।वित्त मंत्रालय के अनुसार, ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और छोटे व्यापारियों के लिए तय जीरो-एमडीआर व्यवस्था के तहत आने वाले लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगेगा। मंत्रालय का कहना है कि करीब 96 प्रतिशत P2M लेन-देन नए प्रावधान से प्रभावित नहीं होंगे। यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को भी नए एमडीआर से छूट जारी रहेगी। इसमें स्ट्रीट वेंडर्स, मोहल्ले की दुकानें और अन्य छोटे कारोबारी शामिल हैं।





