यूपी में बैंकों का एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज एनपीए, हर 8वां कृषि लोन डूबा; चौंकाने वाला खुलासा

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बैंकों का करीब एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में बदल चुका है। मार्च 2026 तक कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में 99481 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए हो गया है। इन क्षेत्रों के 41.73 लाख से अधिक ऋण खाते गैर-निष्पादित हैं। इनमें सबसे खराब स्थिति कृषि क्षेत्र की है, जहां कुल ऋण का 12.97 प्रतिशत एनपीए में बदल चुका है। एमएसएमई क्षेत्र में यह अनुपात 4.98 प्रतिशत और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में 6.81 प्रतिशत है।बैंकों की ओर से शासन और भारतीय रिजर्व बैंक को भेजी गई संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, एनपीए बढ़ने के साथ ही ऋण वसूली भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। तहसील स्तर पर 932565 वसूली प्रमाणपत्र लंबित हैं, जिनमें 17856.36 करोड़ की बैंक देनदारियां फंसी हैं। कृषि क्षेत्र में बैंकों ने 260154 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया है। इसमें से 33,748 करोड़ का कर्ज एनपीए हो चुका है। यानी कृषि क्षेत्र में दिया गया लगभग हर आठवां रुपया फंस गया है। इस क्षेत्र के 30,12,365 ऋण खाते एनपीए की श्रेणी में पहुंच चुके हैं, जो कुल गैर-निष्पादित खातों का करीब 72 प्रतिशत हैं। इससे स्पष्ट है कि किसानों की ऋण चुकाने की क्षमता पर दबाव बढ़ा है। 

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