उत्तराखंड में मदरसों पर बढ़ी सख्ती: लगेगा पांच लाख जुर्माना, प्रशासक की तैनाती

देहरादून : उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश 2026 लागू हो गया है। इसके तहत कई तरह के बदलाव किए गए हैं।उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर सख्ती के लिए सरकार ने आठ अक्तूबर 2025 को लागू हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 को अध्यादेश लाकर संशोधित कर दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) की मंजूरी के बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश 2026 लागू हो गया है।अल्पसंख्यक संस्थानों के कानून में पूर्व में धारा-11 की उपधारा-3 में ये प्रावधान किया गया था कि अल्पसंख्यक प्राधिकरण जो सिलेबस तैयार करेगा, उस पर उत्तराखंड बोर्ड के अनुमोदन की जरूरत होगी। अब सरकार ने इस शर्त को हटा दिया है। इसी प्रकार, धारा-12 की उपधारा-3 को भी हटा दिया गया है, जिसमें उत्तराखंड बोर्ड से अनुमोदन का प्रावधान किया गया था।

कानून में इस संशोधन के बाद अब मदरसों व अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को अधिनियम की धारा-14 के प्रावधान मानने ही होंगे। इसमें स्पष्ट किया गया है कि मान्यता तभी मिलेगी जब संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से स्थापित और संचालित हो। संस्थान परिषद यानी बोर्ड से संबद्ध हो। संस्थान के प्रबंधन की सोसाइटी रजिस्टर्ड हो। संस्थान की भूमि उक्त सोसाइटी, न्यास या कंपनी के नाम हो। संस्थान का वित्तीय लेन-देन अनिवार्य रूप से बैंक में खोले खाते से हो रहा हो। सोसाइटी में निदेशक व अधिकांश पदों पर अल्पसंख्यक हों। सोसाइटी अल्पसंख्यकों समुदाय के हितों की सेवा को बनी हो। संस्थान अपने छात्र, कर्मचारियों को किसी धार्मिक गतिविधि में शामिल होने को बाध्य न करे। निर्धारित योग्यता के हिसाब से शिक्षक हों। संस्थान ऐसा कोई काम न करे जो सांप्रदायिक और सामाजिक सद्भाव की राह में बाधा पैदा करे।

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